254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि कांग्रेस कोई आमूल परिवर्तनवादी पार्टी नहीं है। कांग्रेस को क्रांतिकारी संगठन होने का गौरव तो प्राप्त है। निश्चय ही कांग्रेस को यह गौरव उस आंदोलन ने दिलाया है, जो उसने कभी छेड़ा था कि हम पूर्ण स्वराज लेंगे, सविनय अवज्ञा करेंगे और लगान नहीं देंगे। लेकिन बहुतेरे यह भूल जाते हैं कि यह जरूरी नहीं कि कोई क्रांतिकारी पार्टी आमूल परिवर्तनवादी पार्टी हो ही। कोई क्रांतिकारी पार्टी आमूल परिवर्तनवादी पार्टी भी है या नहीं, यह निश्चय ही उन सामाजिक तथा भावनात्मक वास्तविकताओं पर निर्भर करता है, जो क्रांति की प्रेरणा देती हैं। 1215 में साइमन डि मैंडफोर्ट के नेतृत्व में इंगलैंड के सामंतों ने राजा जॉन के विरुद्ध विद्रोह किया था और राजा को महाधिकार-पत्र (मैग्ना कार्टा) पर हस्ताक्षर करने पर विवश किया था। निश्चय ही उन्हें इंग्लैंड के उन किसानों जैसा क्रांतिकारी कहा जाना चाहिए, जिन्होंने 1381 मे वाट टाइलर के नेतृत्व में अपने मालिकों के विरुद्ध विद्रोह किया था और उन सबको विद्रोह के अपराध में फांसी पर लटका दिया गया था। लेकिन कौन कह सकता है कि क्रांतिकारी होने के कारण सामंत आमूल परिवर्तनवादी भी थे। सामंतों ने विद्रोह किया, क्योंकि वे अपने वर्ग के अधिकारों को राजा और किसानों के विरुद्ध स्थापित करना चाहते थे। सामंतों के विद्रोह को उन लोगों की सामाजिक भावना का समर्थन मिला, जो समुचित अधिकारों से वंचित थे। किसानों के विद्रोह के पीछे उन लोगों की भावना थी, जो दलित और भूखे थे और आजादी चाहते थे। यही कारण है कि किसान क्रांतिकारी भी थे और आमूल परिवर्तनवादी भी। कांग्रेस का विद्रोह किसानों के विद्रोह से काफी मिलता-जुलता है। श्री गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस उतनी ही परिवर्तनवादी है, जितने कि सामंत साइमन डि मैंडफोर्ट के नेतृत्व में थे। जिस प्रकार सामंतों के विद्रोह के पीछे उन लोगों की सामाजिक भावनाएं थीं जो सत्ता से तंग आ चुके थे, न कि उन लोगों की भावनाएं जो पसीना बहाकर भूखे मर रहे थे, उसी प्रकार का विद्रोह कांग्रेस का अंग्रेजों के खिलाफ है। यह सच है कि कांग्रेस ने जनता-जनार्दन का भारी समर्थन प्राप्त किया, लेकिन ऐसा उन्होंने सभी भारतीयों में व्याप्त अंग्रेज-विरोधी भावना को उकसा कर किया। यह भी सच है कि ये भावनाएं भूखे और आजादी से वंचित लोगों की भावनाएं थीं। लेकिन उनकी भावनाओं का सामाजिक रूप से उन्नत तथा धनवान वर्गों की भावनाओं से विरोध था। और यह उन्नत वर्ग कांग्रेस में सदा ही शासक वर्ग रहा है। आम आदमी तो सदा ही छावनी का सेवक रहा है। उनकी भावनाओं ने ही कांग्रेस के स्वरूप को निर्धारित किया है। उनकी भावनाएं अधिकारों से वंचित लोगों की भावनाए हैं। यही कारण है कि कांग्रेस केवल क्रांतिकारी संस्था रही है, आमूल परिवर्तनवादी पार्टी नहीं। जो भी सावधानी से कांग्रेसी सरकारों के कारनामों पर विचार करेगा, वह इस सत्य को देख सकता है। जब से उन्होंने सत्ता संभाली है, तब से उनकी उपलब्धि बस यही है कि वे सस्ती चीजों का फुटकर संग्रह कर सके हैं। अंग्रेजों से भी कहीं अधिक तत्परता से उन्होंने श्रमिकों को गोलियों