11. गांधी और उनका अनशन - Page 272

गांधी और उनका अनशन

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अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों वाली संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र प्रणाली में निर्वाचन-क्षेत्र एकाधिक सदस्य वाला निर्वाचन-क्षेत्र होना ही चाहिए, यानी वहां एक सीट अल्पसंख्यकों के लिए और कम-से-कम एक सीट बहुसंख्यकों के लिए होनी ही चाहिए। दूसरे शब्दों में, वह बहुसदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र निश्चय ही छोटा होना चाहिए, यानी अल्पसंख्यकों के लिए नियत एक सीट के मुकाबले बहुसंख्यक समुदाय की केवल दो सीटें हो सकती हैं। वह बड़ा हो सकता है, यानी बहुसंख्यकों के लिए सीटों की संख्या जितनी कम होगी, उतनी ही अधिक अनिष्ट करने की शक्ति बहुसंख्यकों को मिल जाती है। यह स्पष्ट हो जाएगा, कि यदि इस बात को ध्यान में रखा जाएगा कि जब बहुसंख्यकों की थोड़ी सीटें होती हैं तो वे अपनी मतदान शक्ति के अधिकांश भाग को प्रवाहित करके अल्पसंख्यकों में से अपने मनोनीत उम्मीदवार को आरक्षित सीटों पर जितवा सकते हैं और अल्पसंख्यकों वाली सीट के लिए बहुसंख्यकों द्वारा मनोनीत उम्मीदवार की मदद कर सकते हैं। संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि बहुसंख्यकों को अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना पड़े। अन्यथा निश्चित है कि उन पर बहुसंख्यक हावी हो जाएंगे।

सवर्ण हिंदुओं के लिए अब जो निर्वाचन प्रणाली बनाई गई है, उसमें एक सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र का सिद्धांत अपनाया गया है। यह सच है कि ऊपर से देखने पर निर्वाचन-क्षेत्र संभवतः बहुसदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र दीख पड़ता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि जहां तक सवर्ण हिंदुओं का संबंध है, ये निर्वाचन-क्षेत्र एक-सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र है। सवर्ण हिंदुओं के लिए इस एक-सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र प्रणाली का फल यह होता है कि हिंदू अपने फालतू वोटों का बहुत बड़ा भाग अस्पृश्यों के लिए आरक्षित सीटों के चुनाव की ओर प्रवाहित कर देते हैं और आरक्षित सीट के लिए मनोनीत अपने उम्मीदवार को डूबने नहीं देते।

हिंदू इस बात के लिए आतुर थे कि पूना समझौते के लाभ को निष्प्रभावी करने के लिए और उपाय खोजे जाएं। पूना समझौता जल्दबाजी में किया गया था। अतः उसमें अनेक बातों की परिभाषा नहीं हो पाई। जिन बातों की परिभाषा नहीं हो सकी और जिनके कारण बाद में तीव्र विवाद हुआ, वे हैंः (1) प्राथमिक निर्वाचन में चुने जाने वाली चार की तालिका में चार का अर्थ अधिकतम है या न्यूनतम? (2) हिंदुओं के साथ अंतिम संयुक्त निर्वाचन में मतदान का क्या तरीका होगा? इन प्रश्नों पर विचार करने वाली हैमंड कमेटी ने देखा कि इन दो प्रश्नों के बारे में दो नितांत परस्पर विरोधी दृष्टिकोण थे। एक दृष्टिकोण सवर्ण हिंदुओं का था और दूसरा अस्पृश्यों का। सवर्ण हिंदुओं की ओर से कहा गया कि चार की तालिका से आशय न्यूनतम