11. गांधी और उनका अनशन - Page 273

258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

से था। यदि चार उम्मीदवार नहीं होंगे, तो कोई प्राथमिक निर्वाचन नहीं हो सकता और उसके कारण आरक्षित सीट के लिए कोई चुनाव नहीं हो सकता। उनका कहना था कि वह खाली ही रहनी चाहिए और अस्पृश्यों को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए। अस्पृश्यों का कहना था कि चार की तालिका अधिकतम है। पूना समझौते में चार का अर्थ है ‘चार से अधिक नहीं।’ उसका अर्थ ‘चार से कम नहीं है।’ मतदान के प्रश्न के बारे में हिंदुओं का कहना था कि अनिवार्य वितरणशील मतदान सर्वाधिक उपयुक्त है। दूसरी ओर अस्पृश्यों का आग्रह था कि संचयी मतदान प्रणाली उपयुक्त प्रणाली है।

हैमंड कमेटी ने अस्पृश्यों के दृष्टिकोण को स्वीकार किया और सर्वण हिंदुओं के दृष्टिकोण को अस्वीकार कर दिया। फिर भी यह जानना रुचिकर होगा कि किस कारण हिंदुओं ने अपने दावे पेश किए।

एक तो एकदम स्पष्ट है कि किस कारण हिंदू चाहते थे कि तालिका में चार हों, उससे कम न हों। हिंदुओं का उद्देश्य है कि अंतिम चुनाव में अस्पृश्यों के ऐसे प्रतिनिधि को चुनवाया जाए जो हिंदुओं और हिंदुत्व से समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार और इच्छुक होगा। उसे अंतिम चुनाव में चुनवाने के लिए यह अनिवार्य है कि पहले उसका नाम तालिका में आए। सर्वाधिक समझौतापरस्त अस्पृश्य तालिका में तभी आ सकता है, जब तालिका बड़ी तालिका हो।

यदि तालिका में केवल एक सदस्य होगा तो वह अस्पृश्यों का सर्वाधिक निष्ठावान प्रतिनिधि होगा और हिंदुओं की दृष्टि से वह सर्वाधिक निकृष्ट होगा। यदि दो सदस्य होंगे तो दूसरा पहले से कम निष्ठावान होगा और उस कारण वह हिंदुओं की दृष्टि से उत्तम होगा। यदि तीन होंगे तो तीसरा दूसरे से कम निष्ठावान होगा और उस कारण वह हिंदुओं की दृष्टि से बेहतर होगा। यदि चार होंगे तो चौथा तीसरे से कम निष्ठावान होगा और उस कारण वह हिंदुओं की दृष्टि से सर्वोत्तम होगा। चार की तालिका हिंदुओं को इस बात का सर्वोत्तम अवसर देती है कि वे तालिका में अस्पृश्यों के ऐसे प्रतिनिधि को ला सकें, जो हिंदुओं और हिंदुत्व के प्रति अपने रवैए में सर्वाधिक अनुकूल हो। इसी कारण उन्होंने आग्रह किया कि तालिका कम-से-कम चार की हो।

अनिवार्य वितरणशील मतदान की प्रणाली पर आग्रह करने का उद्देश्य चार से अन्यून की तालिका के विचार की अनुपूर्ति करना था। संचयी मतदान के अधीन निर्वाचक के उतने वोट होते हैं, जितनी की सीटें, लेकिन वह चाहे तो सभी वोट एक उम्मीदवार को दे सकता है या फिर उन्हें दो या दो से अधिक उम्मीदवारों में बांट सकता है। मतदान की वितरणशील प्रणाली के अधीन भी निर्वाचक के उतने