262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अस्पृश्यों को पृथक निर्वाचक-मंडल देना उन्हें सदा-सर्वदा के लिए गुलामी
देना होगा। पृथक निर्वाचक-मंडल मिलने पर मुसलमान सदा मुसलमान ही बना
रहेगा। क्या आप चाहते हैं कि अस्पृश्य सदा-सर्वदा अस्पृश्य ही बने रहें? पृथक
निर्वाचक-मंडल तो इस कलंक को सदा के लिए स्थाई बना देंगे। जरूरी यह है
कि अस्पृश्यता को जड़ से उखाड़ा जाए और जब आप ऐसा कर देंगे तो वह
राक्षसी अवरोध ढह जाएगा, जो एक उद्धृत उच्च वर्ग ने निम्न वर्ग पर थोपा है
जब आप राक्षसी अवरोध को ही नष्ट कर देंगे तो आप पृथक निर्वाचक-मंडल
किसे देंगे? यूरोप के इतिहास पर दृष्टिपात कीजिए। क्या वहां आपकी श्रमजीवी
वर्गों या महिलाओं के लिए पृथक निर्वाचक-मंडल दीख पड़ेंगे? वयस्क मताधिकार
द्वारा आप अस्पृश्यों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं। रूढि़वादियों को भी उनके
आगे वोट के लिए हाथ पसारने पड़ेंगे।
तो किस प्रकार आप मांग करते हैं और उनके प्रतिनिधि डॉ. अम्बेडकर
आग्रह करते हैं कि उनके लिए पृथक निर्वाचक-मंडलों की व्यवस्था की जाए?
डॉ. अम्बेडकर के प्रति मेरे मन में सर्वाधिक सम्मान है। उन्हें कटु होन का पूर्ण
अधिकार है। उनके लिए यह आत्म-संयम का कार्य है कि उन्होंने हमारे सिर
नहीं तोड़-फोड़ दिए हैं। आज उनका मन इतना संदेहशील हो गया है कि उसके
अलावा उन्हें और कुछ सूझता ही नहीं। उन्हें हर हिंद ‘अस्पृश्यों’ का कट्टर
विरोधी दीख पड़ता है और इसमें कुछ भी अस्वाभिक नहीं है। शुरू-शुरू में मुझे
भी दक्षिण अफ्रीका में ऐसा ही लगा था, जहां यूरोपीय मेरे पीछे शिकारी कुत्ते की
भांति लगे रहते थे। उनके लिए यह अति स्वाभाविक है कि वह अपने क्रोध को
व्यक्त करें। लेकिन पृथक निर्वाचक-मंडलों की जो मांग वह कर रहे हैं, उससे
उनके समाज-सुधार का सपना पूरा नहीं होगा। हो सकता है कि उन्हें स्वयं सत्ता
और प्रतिष्ठा मिल जाए, पर अस्पृश्यों का उससे कोई भला नहीं होगा। मैं यह
दावे के साथ कह सकता हूं, क्योंकि मैं वर्षों तक अस्पृश्यों के बीच रहा हूं और
वर्षों तक मैंने उनके साथ दुख-सुख बांटे हैं।
यह सच है कि उनके तर्क को साइमन कमीशन से कुछ बल मिला है। उसने भी कहा थाः (मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में निम्न उद्धरण नहीं दिए गए हैं। वे यहां डॉ. अम्बेडकर की कृति ‘व्हाट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू दि अनटचेबिल्स’, परिशिष्ट VI, पृ. 327 से लिए गए हैंµसंपादक)
(साइमन कमीशन की रिपोर्ट, खंड 2, से लिए गए उद्धरण)
- ........ किसी भी अन्य प्रांत में यह संभव नहीं हो सका है कि वोट
की पात्रता वाले दलित वर्गों के लोगों की संख्या का आकलन किया जा सके।