270 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आपको मालूम हैं कि विधेयक के उपबंध क्या हैं। वह केवल अनुमति देने वाला विधेयक है। उसके अधीन किसी मंदिर के अधिसंख्य उपासक मंदिर में हरिजनों को उपासना की अनुमति दे सकते हैं। उसमें जोर-जबरदस्ती या दबाव का कोई अंश नहीं था। इस विधेयक को आपका आशीर्वाद मिला था। इसका प्रारूप स्वयं श्री राजगोपालाचारी ने तैयार किया था और इसका अनुमोदन आपने किया था।
विधान सभा के एक पिछले सत्र में मैंने श्री राजगोपालाचारी की सहमति से इस विधेयक को प्रस्तुत किया था और उन्होंने विधेयक के पूर्ण समर्थन का वचन दिया था। जब मैंने सुझाव दिया कि विधेयक को वह सरकारी विधेयक के रूप मे प्रस्तुत कर सकते हैं तो उन्होंने इच्छा प्रकट की कि मैं उसे प्रस्तुत करूं। जब मैंने उनसे गत मास 12 जुलाई, 1938 को भेंट की और उन्हें सूचना दी कि मैं इस प्रस्ताव का नोटिस दे रहा हूं कि विधेयक को प्रवर-समिति को सौंप दिया जाए तो उन्होंने कोई आपत्ति नहीं की।
मैं नहीं जानता कि इस बीच क्या हुआ, लेकिन जब विधेयक को प्रवर समिति को सौंपे जाने का मेरा प्रस्ताव सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो उससे दो दिन पहले श्री राजगोपालाचारी ने मुझे बुलाकर चुपचाप कहा कि मैं विधेयक को वापस ले लूं, पर मैंने मना कर दिया। जब यथासमय मैंने विधेयक पर विचार का प्रस्ताव रखा तो श्री राजगोपालाचारी ने खड़े होकर विधेयक का विरोध किया। उन्होंने मुझसे विधेयक को वापस लेने का अनुरोध करते हुए कहा कि वह उसी प्रकार का मंदिर-प्रवेश विधयेक प्रस्तुत करेंगे। वह केवल मलाबार के लिए होगा, अन्य जिलों के लिए नहीं।
श्री राजगोपालाचारी के भाषण का प्रभाव यह हुआ कि मेरा प्रस्ताव गिर गया। मेरे अपने समुदाय के लोगों ने ही अपने वोट उस विधेयक के विपक्ष में दिए, जो उनके सामाजिक एवं धार्मिक उत्थान के लिए प्रस्तुत किया गया था। श्री राजगोपालाचारी के विरोध का एक प्रभाव यह होगा कि समूचे देश में मंदिर-प्रवेश के विरोध को बल मिलेगा।
इस सबसे तो मुझे अपनी बुद्धि पर तरस आने लगता है। हमने तो इस पूर्ण आस्था के साथ पूना समझौते का समर्थन किया था कि कांग्रेस तो हमारे इस प्रयास में वास्तव में मदद देगी कि हम सामाजिक तथा धार्मिक आजादी प्राप्त कर सकें। मैं तो यह सोचने पर विवश हो गया हूं कि कांग्रेस के नेतृत्व में सवर्ण हिंदुओं के साथ संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र में हमारे शामिल हो जाने से हमें मदद नहीं मिली है, अपितु कांग्रेस को शह मिली है कि वह सवर्ण हिंदू नेताओं के नेतृत्व में हमारी आजादी को समाप्त कर सके और हमारे हाथ से हमारा गला कटवा सकें।