11. गांधी और उनका अनशन - Page 287

272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दूसरी ओर मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि आप उन वचनों पर अधिक गंभरता से विचार करें, जो यरवदा अनशन के समय मेरे समुदाय को दिए गए थे। आप देखें कि मद्रास में आपका पूर्णाधिकारी किस प्रकार उन वचनो का पालन कर रहा है। आपने वह अनशन इसलिए किया था कि मेरे लोगों के लिए पृथक निर्वाचक-मंडलों की व्यवस्था करने वाले सांप्रदायिक निर्णय में परिवर्तन किया जाए और उन्हें सवर्ण हिंदुओं के साथ संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्रों में शामिल किया जाए। इसके लिए वचन दिया गया था कि अस्पृश्यता-निवारण के लिए भरसक प्रयास किए जाएंगे। और आपने अनेक बार कहा है कि मंदिर-प्रवेश, अस्पृश्यता-निवारण का मूलाधार है।

अतः सवर्ण हिंदुओं के साथ संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र में हमारे शामिल होने के प्रश्न का और समुदाय की सामाजिक तथा धार्मिक प्रतिष्ठा के उत्थान के प्रति कांग्रेसी मंत्रालय के रवैए का आपस में घनिष्ठ संबंध है।

यदि हमें हिंदू मंदिरों में प्रवेश की आजादी नहीं है तो हम हिंदू हैं ही नहीं, और यदि हम हिंदू हैं ही नहीं तो हम उनके साथ संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र में क्यों शामिल हों। क्या उसका उद्देश्य मुस्लिमों तथा अन्य संप्रदायों के विरुद्ध उनकी संख्या में वृद्धि करने का है?

यदि इस दृष्टिकोण से मद्रास की स्थिति पर विचार करें तो आप अनुभव करेंगे कि मंदिर-प्रवेश संबंधी विधेयक को अस्वीकार करके मद्रास की कांग्रेसी सरकार ने दलित वर्गों के साथ घोर विश्वासघात किया है।

मेरे समुदाय की आर्थिक दशा सुधारने के लिए सरकारी निधि से या गैर-सरकारी संसाधनों से कितनी भी राशि क्यों न खर्च कर दी जाए, पर वह मंदिर-प्रवेश द्वारा अस्पृश्यता-निवारण का कोई विकल्प नहीं होगा। जैसा कि आपने एक बार स्वयं कहा था कि दलित वर्गों के हित-साधन के यज्ञ में मंदिर-प्रवेश सवर्ण हिंदुओं की निष्ठा की अग्नि-परीक्षा है।

श्री राजगोपालाचारी के मंदिर-प्रवेश संबंधी विधेयक में न केवल एक विकट जिले के चयन की कुशल चाल छिपी हुई है, बल्कि वह हमारे समुदाय को सवर्ण हिंदुओं की इच्छा का दास भी बनाता है। यह एक ऐसी नीति है, जिसे और कार्यरूप देने और श्रम-आयुक्त की मदद के लिए सलाहकार-बोर्डों की नियुक्ति की गई है। उनमें इस प्रांत के हरिजन सेवक संघों के सवर्ण हिंदुओं को मेरे लोगों के भाग्य का मार्गदर्शन करने के लिए सरकारी सुविधाएं दी गई हैं। मैं यह आशा तो नहीं करता कि आप उन विधेयकों के बारे में मेरे विचारों से सहमत हों, जो मद्रास मंदिर-प्रवेश विधेयक को अस्वीकार करने के बाद श्री