1. सभ्यता या घोर असभ्यता - Page 29

14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कारण यह इन सात करोड़ 95 लाख प्राणियों को मानवता के स्तर तक उठाने में असफल रही है।

सभ्यता एक वरदान है। वह मानव व प्रकृति, कला व कौशल के ज्ञान का संचित भंडार है। वह एक नैतिक संहिता है, जो अपने साथियों के प्रति मानव के आचरण को विनियमित करती है। वह एक सामाजिक संहिता है, जो प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों-विनियमों की व्यवस्था करती है। वह एक नागरिक संहिता है, जो शासक तथा शासित के अधिकारों का कर्तव्यों का प्रावधान करती है। वह एक आध्यत्मिक दर्शन है, जो लौकिक को अलौकिक से जोड़ता है। सभी प्रजातियों को यह सौभाग्य नहीं मिला है कि वे उसका पूर्णतम विकास कर सकें। अनके उसी अवस्था में हैं, जहां से उनका विकास होना शुरू हुआ था। अनेक प्रजातियां एक-दो कदम चल कर रुक गईं। अन्य केवल घेरे के भीतर चक्कर काट रही हैं। आस्ट्रेलिया और उसके आसपास छोटे-बड़े द्वीपों की आदिम जातियों के बारे में जब कुछ वर्षों पूर्व पहले-पहल पता चला तो पता चला था कि उन्हें थोड़ा-बहुत बोलना और आग जलाना आ गया था। वे मध्य-युग की जंगली अवस्था से आगे नहीं बढ़ सकी थीं। हडसन खाड़ी क्षेत्र की आदिम जाति एल्लियापास्कस तथा कोलम्बिया घाटी के मूल निवासी तीर व कमान की अवस्था से आगे नहीं बढ़ सके। बर्तन बनाने, पशु पालने और लोहे को गलाने के बारे में वे कुछ नहीं जानते थे। मिस्र, बेबीलोनिया, असीरिया और यहां तक कि रोम तथा यूनान की सभ्यता भी केवल गतानुगतिका की सभ्यता है। इन देशों में तत्कालीन मानव ने उन्हीं साधनों के प्रयोग में प्रगति और सफलता प्राप्त की, जो उसे आदि मानव ने विरासत के रूप में दिए थे, जब वह जंगली अवस्था में था और इनकी सभ्यता के इतिहास में इन्हीं का ब्यौरा मिलता है। उन्होंने अपने पूर्वजों से प्राप्त सभ्यता में कुछ भी ऐसी प्रगति नहीं की, जिसे क्रांतिकारी कहा जा सके। उन्होंने केवल इतनी प्रगति की कि उनके पूर्वज जिस बात को फूहड़पने से करते थे, उसे वे बेहतर ढंग से करने लगे। यह प्रगति एक के बाद दूसरी अवस्था में तेजी से नहीं हुई। इसमें कोई शक नहीं कि जब पर्याप्त प्रगति करके मान ‘बर्बर’ कहलाया, उससे पूर्व वह अनेक युगों तक जंगली रहा। इसमें कोई भी संदेह नहीं कि जब मानव सभ्यता की निम्नतम अवस्था के अंतिम शिखर पर पहुंचा, उससे पूर्व बर्बरता के अन्य अनेक युग गुजरे। इन क्रमिक युगों की ठीक-ठीक कालावधि के बारे में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है, लेकिन यह अनुमान निरापद हो सकता है कि यह अवधि एक लाख वर्ष की रही होगी।

निश्चय ही सभ्यता कोई ऐसी वस्तु नहीं, जो आसानी से मिल सकती है। सभ्यता तो एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तु है, न केवल एक पीढ़ी के लिए, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए भी। विरासत में मिलने पर एक पीढ़ी की सभ्यता अगली पीढ़ी के लिए