278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हो गया है। इधर श्री गांधी ने अपना अनशन तोड़ा तो उधर हिंदुओं ने अस्पृश्यों के प्रति उपजा नवजात प्रेम छोड़ा।
सेवक संघ की अकाल अवनति के कारण मेरे लिए जरूरी नहीं कि मैं उसके कार्यकलाप पर विचार करूं। लेकिन उसे श्री गांधी का भव्य स्मारक माना जाता है। अंतः यह उचित ही होगा कि मैं संघ के कार्य और उसकी कार्य-नीति की निरख-परख करूं।
सेवक संघ का कार्य कतिपय सुस्पष्ट नीतियों के अनुसार चलाया जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में सेवक संघ का प्रयास रहा है कि वह अस्पृश्यों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन दे और कला, तकनीक एवं व्यवसाय संबंधी पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्तियों की स्थापना करे। वह हाई स्कूल के छात्रों को भी छात्रवृत्तियां देता है। संघ कालिजों तथा हाई स्कूलों में पढ़ने वाले अस्पृश्य छात्रों के लिए छात्रावास भी चलाता है। संघ की शिक्षा संबंधी गतिविधियों का अधिकांश भाग अस्पृश्य बच्चों के लिए अलग से प्राइमरी स्कूल चलाने में ही खप जाता है। ये स्कूल ऐसे स्थानों पर चलाए जाते हैं, जहां आसपास या तो कोई सांझे स्कूल नहीं होते या जहां सांझे स्कूलों में उन्हें दाखिला नहीं मिलता।
अब संघ के कल्याण-कार्यों की बारी है। इस मद के अधीन चिकित्सा-सहायता आती है, जिसे संघ अस्पृश्यों को देने का प्रयास करता है। यह कार्य संघ के नरमदिल कार्यकता करते हैं। वे हरिजन बस्तियों में जाते हैं और बीमार अस्पृश्यों की चिकित्सा करते हैं। संघ अस्पृश्यों के लिए कुछ डिस्पेंसरियां भी चलाता है। संघ की यह अति नगण्य-सी गतिविधि है।
संघ का अधिक महत्वपूर्ण कल्याण-कार्य पानी की व्यवस्था है। इसके वास्ते संघµ(1) अस्पृश्यों के लिए नए कुंए खुदवाता है या ट्यूबवेल या पम्प लगवाता है, (2) पुराने कुंओं की मरममत करवाता है, और (3) स्थानीय प्रशासनों और संस्थाओं से आग्रह करता है कि वे अस्पृश्यों के लिए कुंए खुदवाएं या उनकी मरम्मत करवाएं।
संघ की तीसरी गतिविधि आर्थिक है। लगता है कि वह कुछ औद्योगिक स्कूल चला रहा है। यह दावा किया जाता है कि संघ-संचालित औद्योगिक स्कूलों में अनेक प्रशिक्षित कारीगर तैयार किए गए हैं और वे स्वतंत्र रूप से व्यवसाय कर रहे हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार अधिक सफल तथा ठोस कार्य यह किया गया कि अस्पृश्यों के बीच सहकारी समितियों का गठन और पर्यवेक्षण किया गया।
संघ के कार्य का यह संक्षिप्त रिकार्ड है। अधिकतर इसका निर्देशन सवर्ण हिंदू