280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत सद्गुण को बढ़ावा देना है। मैं तो चाहूंगा कि बोर्ड अपनी समूची शक्ति ऐसे कार्यक्रम पर केंद्रित करे, जो दलित वर्गों के सामाजिक पर्यावरण में परिवर्तन लाए।
सामान्य भाषा में अपने विचारों को प्रस्तुत करने के बाद अब मैं संघ के कार्य के बारे में कुछ ठोस प्रस्ताव रखने का साहस करूंगा।
मेरा विचार है कि संघ सबसे पहला कार्य तो यह करे कि भारत-भर में एक अभियान छेड़े। उसका उद्देश्य हो कि दलित वर्ग अपने नागरिक अधिकार प्राप्त कर सके, जैसे गांव के कुओं से पानी लेना, गांव के स्कूलों में प्रवेश, ग्राम-चावड़ी में प्रवेश, सार्वजनिक वाहन का उपयोग आदि।
यदि गांवों में ऐसा कार्यक्रम चलाया जाएगा तो वह हिंदू समाज में आवश्यक सामाजिक क्रांति लाएगा। उसके बिना दलिर्त वर्ग बराबर की सामाजिक प्रतिष्ठा कभी भी प्राप्त नहीं कर सकेंगे। लेकिन बोर्ड को उन कठिनाइयों का ज्ञान तो होना ही चाहिए जो उन्हें झेलनी पड़ेंगी, यदि नागरिक अधिकारों का यह अभियान चलाया जाएगा। यहां मैं अनुभव के आधार पर बता सकता हूं, क्योंकि अध्यक्ष होने के नाते मुझे पता है कि उसक समय क्या हुआ, जब दलित वर्ग संस्थान और सामाजिक समता संघ ने बंबई प्रेसिडेंसी के कोलाबा और नासिक जिलों में ऐसा अभियान छेड़ा था।
सबसे पहले तो दलित वर्गों तथा सवर्ण हिंदुओं के बीच दंगे होंगे। उनके फलस्वरूप एक-दूसरे के सिर फोड़े जाएंगे और एक-दूसरे पर फौजदारी के केस चलाए जाएंगे। इस संघर्ष में दलित वर्ग बुरी तरह मार खाएंगे। इन दोनों जिलों में चलाए गए सामाजिक संघर्ष के इतिहास में एक भी ऐसा केस नहीं है, जिसमें पुलिस और मजिस्ट्रेट ने दलित वर्गों की रक्षा की हो, भले ही न्याय उनके पक्ष में था। दूसरे, ग्रामवासी उसी क्षण दलित वर्गों का पूर्ण बहिष्कार कर देंगे, जिस क्षण उन्हें लगेगा कि दलित उनकी बराबरी का दर्जा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।
मैंने अनेक बाधाओं में से केवल उन दो का उल्लेख किया हैं, जिन्हें संघ को दूर करना होगा, यदि नागरिक अधिकारों के इस अभियान को सफल बनाना है। संघ को देहाती क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की एक सेना खड़ी करनी होगी। वे दलित वर्गों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का प्रोत्साहन देंगे और उससे उत्पन्न होने वाली किसी कानूनी कार्यवाही में सफलता के लिए उनकी मदद करेंगे। यह सच है कि इस कार्यक्रम के कारण सामाजिक दंगे और हिंसात्मक झड़पें तक हो सकती हैं। लेकिन मेरा विचार है कि उन्हें टाला नहीं जा सकता। मैं जानता हूं