11. गांधी और उनका अनशन - Page 304

गांधी और उनका अनशन

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प्रतिरोध वे सीधी कार्यवाही से क्यों नहीं करते? मैं समझ सकता हूं कि अन्याय के प्रति विरोध का आयोजन करने में यह समस्या रहती है कि प्रतिरोध के ऐसे रूप

खोजे जाएंगे जिनसे तर्क तथा नैतिकता-संगत कार्यवाही के समूहों के प्रति अल्प संसाधन नष्ट न हों। लेकिन उसके कारण कोई कठिनाई नहीं हो सकती। सत्याग्रह अथवा सविनय प्रतिरोध के रूप में श्री गांधी ने ऐसे प्रतिरोध की खोज की है, जो नैतिक दृष्टि से विवाद से परे है। क्या कारण है कि श्री गांधी हरिजन सेवक संघ से नहीं कहते कि अपने प्रति अन्याय के उन्मूलन के लिए अस्पृश्य लोग सवर्ण हिंदुओं के खिलाफ सत्याग्रह छेडें? उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सत्याग्रह छेड़ने के लिए भारतवासियों को ललकारा। अस्पृश्यों के हित में सवर्ण हिंदुओं के विरुद्ध वह उसी हथियार का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहते?

श्री गांधी के पास इस प्रश्न का क्या उत्तर है? मुझे तो केवल यही उत्तर दीख पड़ता है कि यह मार्ग उनकी राजनीति के आड़े आता है। श्री गांधी राष्ट्र के सिरमौर बने ही रहना चाहते हैं। मेरा विचार है कि उनका जीवन ही नीरस हो जाएगा, यदि किसी कारण वह राष्ट्र के सिरमौर न रहें। मेरा विचार है कि वह सर्वाधिक महत्वकांशी राजनेता है। मुझे मालूम है कि वह उन्हीं लोगों को अपना प्रतिद्वंदी समझते हैं, जिन्हें वह अपना मित्र कहते हैं। राष्ट्र का सिरमौर बने रहने का अर्थ है कि उन्हें कांग्रेस की अखंडता को अक्षुण्ण रखना ही होगा। कांग्रेस में 99 प्रतिशत हिंदू हैं। श्री गांधी कांग्रेस की अखंडता को कैसे अक्षुण्ण रख सकते हैं, यदि वह हरिजन सेवक संघ को यह निर्देश दें कि अस्पृश्यों के हित में वह हिंदुओं के विरुद्ध सत्याग्रह चलाएं। हिंदू कांग्रेस से अलग हो जाएंगे और कांग्रेस भंग हो जाएगी। यह तो श्री गांधी के हितों के प्रतिकूल होगा। यही कारण है कि श्री गांधी और सेवक संघ ने अस्पृश्यता-निवारण के एकमात्र उपाय के रूप में शांतिपूर्ण अनुरोध को अपनाया है। यह ऐसा उपाय है, जिससे हिंदुओं तथा कांग्रेस को ठेस पहुंचाने की अत्यल्प संभावना है। न केवल बड़े मसलों के बारे में, अपितु छोटे मसलों के बारे में भी सेवक संघ यह सावधानी बरतता है कि हिंदुओं को कोई ठेस या क्लेश न पहुंचे। मिसाल के लिए, मुझे बताया गया कि छात्रवृत्ति देते समय सेवक संघ आवेदनकर्ता की राजनीतिक प्रतिबद्धता के बारे में छानबीन करता है और यदि यह पाया जाता है आवेदनकर्ता का नाता कांग्रेस या हिंदू-विरोधी समुदाय से है, तो वह संघ से कोई राशि प्राप्त नहीं कर सकता।

मेरा विचार है कि अब किसी के मन में यह संदेह नहीं रह गया होगा कि श्री गांधी और सेवक संघ ने स्वयं को शांतिपूर्ण अनुरोधों तक इन राजनीतिक कारणों से सीमित रखा है कि कहीं हिंदू नाराज न हो जाएं और कांग्रेस भंग न हो जाए। इसी आशय से मैं कह चुका हूं कि संघ का राजनीति से वास्ता है और उसकी विफलता