1. सभ्यता या घोर असभ्यता - Page 31

16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सबसे पुरानी सभ्यता है। हिंदू बार-बार बड़े जोरशोर और द्वेषपूर्ण घमंड से कहता है कि जब संसार की अन्य जातियां आदिम जामियों की भांति जीवन जी रही थीं और नंगी घूम रही थीं तो भारत सभ्यता की एक बड़ी ऊंची चोटी पर पहुंच चुका था। हिंदू यह भी कहता है कि उसकी सभ्यता में जन्मजात शक्ति है और इसी कारण वह आज तक जिंदा बची है, जब कि मिस्र, बेबीलोन, यहूदी, रोम और यूनान की सभ्यताएं मिट चुकी हैं। ऐसा नजरिया, भले ही कितना भी जायज हो, खास मुद्दे की अनदेखी करता है। खास मुद्दा यह नहीं है कि सभ्यता प्राचीन है और वह जिंदा रह सकी है। ख्1, खास मुद्दा यह है कि सभ्यता के क्या-क्या गुण हैं? क्या उसकी कोई उपयोगिता है? यदि वह बची रह सकी है तो किस स्तर पर जिंदा है? या यूं कहें कि असली सवाल यह है कि क्या हिदू सभ्यता यानी उसकी सामाजिक परंपरा बोझ है या उससे कोई लाभ है और यह सभ्यता अपनी प्रगति और अपने विस्तार से समाज के विभिन्न वर्गों और व्यक्तियों को क्या कुछ देती है?

मानव और प्रकृति विषयक ज्ञान में हिंदू सभ्यता की क्या देन रही है? अनेक देशभक्त हिंदुओं का यह विश्वास है कि मानव और प्रकृति के विषय में ज्ञान का आरंभ हिंदुओं से हुआ। यदि मान भी लिया जाए कि ऐसी ही है तो निश्चय ही यह अति अल्प विकसित अवस्था से आगे नहीं बढ़ सका। क्या कोई हिंदू, ठीक हो या गलत, यह कहेगा कि हिंदू भाषा-विज्ञान वहीं पर है, जहां पाणिनि और कात्यायन ने उसे छोड़ा था? यह वह, गलत हो या सही, इस बात का खंडन कर सकता है कि दर्शन-शास्त्र वहीं पर है, जहां कपिल और गौतम ने उसे छोड़ा था? क्या वह कहेगा कि साहित्य वहीं पर है, जहां व्यास और बाल्मीकि ने उसे छोड़ा था? कहा जाता है कि अध्यात्म-विधा में तो हिंदू-चिंतन चरम उत्कर्ष प्राप्त कर चुका है। लेकिन देखिए हिंदू अध्यात्म के बारे में प्रो. हरदयाल क्या कहते हैं ख्2, ः

अध्यात्म-विधा भारत का कलंक रही है। उसने उसके इतिहास को चौपट

किया है, उसे विनाश के गढ्ढे मे धकेल दिया है। उसने उसके महापुरुषों को

दयनीय स्थिति में डाल कोरा वितंडतावादी बना दिया है और उन्हें निरर्थक जिज्ञासा

और चेष के गलियारों में भटका दिया है। अनेक सदियों तक वह भारतीय

विद्वानों के लिए मृगमरीचिका रही है। उसने कुतर्क को, कला और कपोल कल्पनाओं

को ज्ञान में ऊंचे सिंहासन पर बैठा दिया है। उसने भारतीयों को इतना निकम्मा

बना दिया है कि जिससे वे सैंकड़ों साल तक कोल्हू के बैल की भांति उसी

  1. देखिए, मेरी कृति ‘एनीहिलेशन आफ कास्ट’

  2. माडर्न रिव्यू, जुलाई 1912