11. गांधी और उनका अनशन - Page 316

गांधी और उनका अनशन

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स्थल के रूप में हिंदू उसका परित्याग कर देते हैं तो यह नहीं कहा जा सकता है कि वह इस अर्थ में खोला गया है कि हिंदुओं ने सहर्ष उन्हें वहां बुलाया है। सच्चाई जानने के लिए एक और संभावना है, जिसकी ओर ध्यान देना चाहिए।

अस्पृश्यों के लिए किसी मंदिर के द्वार उसी भाव से खोले जा सकते हैं, जिस भाव से लंदन का रिट्ज होटल सबके लिए खुला हुआ है। लेकिन हम जानते हैं कि वास्तव में रिट्ज होटल सबके लिए खुला हुआ नहीं है। वह केवल उन्हीं के लिए खुला है जो उसका खर्च बर्दाश्त कर सकते हैं। उसी प्रकार किसी मंदिर के द्वार अस्पृश्यों के लिए खुले हो सकते हैं, पर वास्तव में वे केवल उन्हीं अस्पृश्यों के लिए खुले होते हैं, जो उसमें प्रवेश की सामर्थ्य रखते हैं। यदि मंदिर-प्रवेश की कीमत पिटाई या सामाजिक बहिष्कार है तो यह कीमत निषेधात्मक होगी और भले ही मंदिर नाममात्र के लिए खुला हो, पर वास्तव में वह बंद होता है। पिटाई और सामाजिक बहिष्कार तो हिंदुओं के लिए स्वाभाविक बात है, अतः यह मान लेने में कोई ज्यादती नहीं होगी कि किन्हीं मामलों में हिंदू ऐसे उपायों का सहारा लेंगे, ताकि अस्पृश्य उस मंदिर में प्रवेश करने का साहस न कर सकें, जो उनके लिए खोल दिया गया है। यदि मामला ऐसा है तो यह धोखाधड़ी है।

यह ठीक-ठाक तो बताना कठिन है कि इन दो प्रकार के मामलों में से किसकी संख्या अधिक है। लेकिन कतिपय तथ्यों के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है। भारत में इस समय दो प्रकार के हिंदू हैं। एक तो रूढि़वादी हिंदू हैं, जो राजनीति की अपेक्षा धर्म की अधिक चिंता करते हैं। दूसरे कांग्रेसी हिंदू हैं, जो राजनीति की अधिक चिंता करते हैं, धर्म की कम। रूढि़वादी हिंदुओं के कोई राजनीतिक स्वार्थ नहीं होते। वे कितने भी गलत क्यों न हों, वे ईमानदार यानी अपने विश्वास के प्रति दृढ़ हो सकते हैं। कांग्रेसी हिंदुओं के राजनीतिक स्वार्थ होते हैं। वे सदा ही ईमानदारी का दृष्टिकोण नहीं अपना सकते और उनका झुकाव बेईमानी के तरीके अपनाने की ओर होता है। भले ही परित्याग का पहला तरीका ईमानदारी का है, पर दुनिया की नजरों में वह हिंदू समाज के लिए अपयशकारी है। अतः राजनीतिक दृष्टि से वह उपयुक्त नहीं है। सवर्ण हिंदुओं द्वारा नाममात्र के लिए मंदिर खोल देने और वास्तव में उसे बंद कर देने का दूसरा तरीका राजनीतिक दृष्टि से अति लाभकारी है। इस व्यवस्था का यह गुण है कि वह ऊपर से तो दुनिया को जता देती है कि खाता खुल गया है, पर गुप्त रूप से ऐसी व्यवस्था करती है कि जिस व्यक्ति के नाम से खाता खोला गया हो, वह उसमें से कुछ भी न निकाल सके और दुनिया को भनक तक न लगे। कांग्रेसी हिंदू संख्या में अधिक हैं और रूढि़वादी हिंदू कम हैं। ऐसी स्थिति में मेरा विचार है कि निश्चय ही कांग्रेसी हिंदू संख्या में रूढि़वादी हिंदुओं से अधिक होंगे।