11. गांधी और उनका अनशन - Page 324

गांधी और उनका अनशन

शिकायतें आपकी सेवा में प्रस्तुत कर दूं, जो इस राज्य के हरिजन भोग रहे हैं।

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  1. महामहिम महाराजा द्वारा जारी की गई उद्घोषणा हरिजनों के लिए वास्तव

में एक वरदान है, लेकिन मंदिर-प्रवेश के अलावा अन्य सभी सामाजिक

असुविधाएं हरिजन झेल रहे हैं। यह उद्घोषणा हमें और रियायतें दिए

जाने के मार्ग में एक बाधा है। सरकार हरिजनों की दशा सुधारने के लिए

कोई कदम नहीं उठाती है।

  1. पंद्रह लाख हरिजनों में से कुछ ग्रेजुएट हैं, आधे दर्जन अंडर-ग्रेजुएट हैं।

पचास ने स्कूली शिक्षा पूरी कर ली है और दो सौ से अधिक के पास

वर्नाक्यूलर प्रमाण-पत्र हैं। हालांकि सरकार ने लोक सेवा आयोग की

नियुक्ति कर दी है, लेकिन हरिजनों की नियुक्तियां नगण्य हैं। हरिजनों

की नियुक्ति एक-दो सप्ताह के लिए दी जाती है। लोक सेवा भर्ती के

नियमों के अनुसार प्रार्थी पुनः आवेदन एक वर्ष के बाद ही कर सकता

है, जब कि सवर्ण को एक वर्ष या उससे अधिक समय के लिए नियुक्त

किया जाएगा। जब विधान सभा के समक्ष नियुक्तियों की सूची लाई जाती

है तो नियुक्तियों की संख्या सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के बराबर होगी,

लेकिन सभी हरिजनों के पद की अवधि एक सवर्ण के पद की अवधि

के बराबर होगी। अधिकारी वर्ग इस प्रकार की धांधली कर रहा है। इस

प्रकार लोक सेवा सवर्णों की सांझी संपत्ति है। किसी हरिजन को उसका

लाभ नहीं मिलता।

  1. कुछ वर्ष पूर्व महामहिम महाराजा ने उद्घोषणा की थी कि हर हरिजन

को गुजर-बसर के लिए तीन एकड़ भूमि दी जाए, लेकिन अधिकारी तो

सवर्ण हैं और वे सदा ही उद्घोषणा का पालन करने से कतराते रहते हैं।

यद्यपि सरकार चाहती है कि नगरों के निकट पशु चराने के लिए काफी

भूमि दी जाए, लेकिन हरिजनों को जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं दिया

गया है। हरिजन अब भी सवर्णों के आहतों में रह रहे हैं और अनेकानेक

कष्ट भोग रहे हैं। यद्यपि काफी भूमि ‘आरक्षित’ खाते में पड़ी हुई है,

पर भूमि के आवंटन के लिए हरिजनों के आवेदन-पत्रों को न तो महत्व

दिया जाता है और न ही उनकी सुनवाई होती है। अधिकांश भू-भागों

का लाभ सवर्ण उठाते हैं।

  1. सरकार प्रत्येक हरिजन समुदाय से एक सदस्य को प्रतिवर्ष असेंबली की

सदस्यता के लिए मनोनीत करती है। यद्यपि उन्हें असेंबली के सामने

हरिजनों की शिकायतें प्रस्तुत करने के लिए मनोनीत किया जाता है, पर