11. गांधी और उनका अनशन - Page 326

गांधी और उनका अनशन

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भागों में कुछ बस्तियां बसाएगी। यह कार्य सवर्ण अधिकारी करेंगे। मेरी

राय में योजना सफल नहीं होगी, क्योंकि सरकार इसके लिए अधिक पैसा

नहीं देती है। मुझे खेद है कि जहां ट्रावनकोर सरकार हरिजनों के हित के

लिए एक ‘आना’ खर्च करती है, वहां कोचीन का देशी राज्य उसी के

लिए एक रुपया खर्च करता है।

इस समय ट्रावनकोर के अधिकांश प्रजा-जन ‘राज्य कांग्रेस’ नामक संगठन के अधीन उत्तरदायी सरकार के लिए जोर-शोर से आंदोलन कर रहे हैं। इस जन-संगठन के नेता राज्य के चार प्रमुख समुदायों के हैं। वे हैं नायर, मुसलमान, ईसाई और एजावा। राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष श्री तानु पिल्लै ने एक वक्तव्य जारी किया है। इसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि दलित वर्गों को विशेष रियायतें दी जाएंगी। दलित वर्ग के सभी नेता उस समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जब वे राज्य कांग्रेस के रवैए पर अमल होता हुआ देखें। अब हमें लगने लगा है कि इन नेताओं के वायदे खोखले हैं।

अब मुझे विश्वास हो चला है कि इन नेताओंं ने दलित वर्ग के हितों की उपेक्षा की है। राज्य कांग्रेस का गठन राष्ट्रवाद के सिद्धांतों पर किया गया था, पर अब वह सांप्रदायवादी संगठन बन गया है। नेताओं के मन में सांप्रदायिकता ने घर कर लिया है। हर सार्वजनिक भाषण, वक्तव्य और लेख में ये नेता केवल इन चार प्रमुख समुदायों का उल्लेख करते हैं और हमारी बिल्कुल भी परवाह नहीं करते।

मुझे आशंका है कि यदि ट्रावनकोर के राजनीतिक आंदोलन के नेताओं का यही हाल रहा तो उत्तरदायी सरकार बन जाने पर तो दलित वर्गों की हालत और भी दयनीय हो जाएगी, क्योंकि उस समय तो सरकार की बागडोर पूरी तरह उक्त समुदायों के हाथों में आ जाएगी और वे दलित वर्गों के अधिकारों तथा विशेषाधिकारों को हड़प कर जाएंगे।

राज्य कांग्रेस की कार्यकारिणी की बैठकों के दो-तिहाई समय में अलेप्पी नारियल जूट फैक्टरियों की हड़ताल की चर्चा होती रही, पर उनमें उन हरिजन श्रमिकों के बारे में कोई चर्चा नहीं की गई, जो अनेकानेक कठिनाइयों को झेल रहे हैं। फैक्टरियों के श्रमिक सवर्ण हैं और उत्तरदायी सरकार प्राप्त करने का आंदोलन एक प्रकार से हरिजन-विरोधी आंदोलन है। राज्य कांग्रेस के हर नेता का उद्देश्य सवर्णों की दशा सुधारने का है। प्रमुख समुदायों के नेताओं का रवैया कुछ-कुछ स्वार्थ लोलुपता का है और वे अपनी उन्नति के लिए दलित वर्गों के हितों की बलि चढ़ा देंगे।