13. हिंदुओं से अलगाव - Page 339

324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हैं, अतः कोई कारण नहीं कि एक को दूसरे से अच्छा माना जाए। यह माना जा सकता है कि सभी धर्मां की एक स्वर से मान्यता है कि अच्छा करने में ही जीवन की सार्थकता है। उस हद तक तो इस तर्क की वैधता को स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन जब यह तर्क उस हद को पार करता है और आग्रह करता है कि इसके कारण इसमें कोई तुक नहीं कि एक धर्म को दूसरे से बेहतर समझा जाए, तो वह एक मिथ्या हो जाता है।

इस दृष्टि से तो सभी धर्म समान हैं कि वे सभी शिक्षा देते हैं कि ‘अच्छा’ करने में ही जीवन की सार्थकता है। लेकिन ‘अच्छा’ क्या है? इस प्रश्न का उत्तर सभी धर्म एक जैसा नहीं देते। निश्चय ही इस बारे में उनका मतभेद है। एक धर्म भाईचारे को अच्छा मानता है, तो दूसरा जातिप्रथा और अस्पृश्यता को।

एक और पक्ष भी है, जिसके बारे में सभी धर्म एक जैसे नहीं हैं। जहां धर्म ‘अच्छे’ की व्याख्या करने वाला सर्वोच्च प्रमाण है, वहां वह ‘अच्छे’ का प्रचार और प्रसार करने वाले प्रेरक शक्ति भी है। सभी धर्म अच्छे के प्रचार और प्रसार के लिए जिन साधनों तथा उपायों की दुहाई देते हैं, उनके बारे में क्या वे एकमत हैं? जैसा कि प्रो. टीले ख्1, ने कहा हैः

मानव-जाति के इतिहास में धर्म एक सर्वाधिक शक्तिशाली प्रेरक शक्ति रही

है। उसने राष्ट्रों को संजोया है और उजाड़ा है। उसने साम्राज्यों को जोड़ा भी है

और तोड़ा भी है। जहां उसने अति क्रूर तथा बर्बर कर्मों को तथा अति जघन्य

रीति-रिवाजों को मान्यता दी, वहां उसने शौर्य, आत्म-बलिदान और निष्ठा जैसे

अति श्लाघनीय कृत्यों की प्रेरणा भी दी। जहां उसने अति रक्तरंजित युद्ध, विद्रोह

और अत्याचार कराए, वहां उसने राष्ट्रों के लिए स्वाधीनता, सुख और शांति के

द्वार भी खोले। कभी उसने अत्याचार का साथ दिया, तो कभी उसने उसके बंधनों

को काटा। कभी वह प्रगति, विज्ञान और कला का कट्टर शत्रु रहा, तो आज वह

एक नई तथा प्रतिभाशाली सभ्यता का सृजन एवं लालन-पालन कर रहा है।

इन अस्थिरताओं के अलावा उनकी अपनी-अपनी दृष्टि के अनुसार अच्छे के संवर्धन के उनके उपायों में स्थाई भेद हैं। क्या हिंसा की वकालत करने वाले धर्म नहीं हैं? क्या अहिंसा की वकालत करने वाले धर्म नहीं हैं? इन तथ्यों को देखते हुए यह कैसे कहा जा सकता है कि सभी धर्म समान हैं और उन्हें एक-दूसरे से बेहतर समझने में कोई तुक नहीं है।

दूसरी आपत्ति उठाकर हिंदू, केवल यह प्रयास कर रहा है कि गुण-दोष के

क्रौले, द्वारा उद्धृत, ट्री, ऑफ लाइफ, पृ. 5