हिंदुओं से अलगाव
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होता है। यह रक्त-संबंध ही है, जिसके कारण यह सहानुभूतिपूर्ण रोष अथवा कोमल भावना और क्रोध का यह मिलाजुला रूप उपजता और उभरता है। किसी भी दृष्टि से व्यक्ति के लिए यह कोई नगण्य मूल्य नहीं है। प्रो. मैक्डोगल के शब्दों मेंः
कोमल भावना और क्रोध का यह गहरा गठजोड़ मानव के सामाजिक जीवन
के लिए अति महत्वपूर्ण है। इसकी सही समझबूझ नैतिक भावनाओं के सही
सिद्धांत के लिए बुनियादी बात है, क्योंकि इस प्रकार उपजा क्रोध सभी प्रकार
के नैतिक रोष का स्रोत है और नैतिक रोष पर ही न्याय और सार्वजनिक विधि
का अधिकांश भाग मुख्यतः आधारित है।
यह रक्त-संबंध ही उदारता का जनक है और वही अन्याय के प्रतिकार के लिए जरूरी नैतिक रोष को ललकारता है। रक्त-संबंध से वह इच्छा-शक्ति उपजेगी, जो हिंदुओं के अत्याचार और दमन का सामना करने के लिए सगे समुदाय का समर्थन जुटाएगी। आज तो अस्पृश्यों को उस अत्याचार को अकेले ही सहना पड़ता है। किसी अन्य समुदाय से रक्त-संबंध स्थापित करना ही वह सर्वोत्तम बीमा है, जिसकी व्यवस्था हिंदू-अत्याचार और हिंदू-दमन के खिलाफ अस्पृश्य कर सकता है।
रक्त-संबंध के अर्थ और कर्म के पूर्वोक्त निरूपण को जो व्यक्ति ध्यान में रखेगा, उसे इस प्रस्थापना को स्वीकार करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए कि अपने अलगाव को अलविदा करने के लिए अस्पृश्यों को ऐसे अन्य समुदाय में शामिल होना ही पड़ेगा, जो जात-पांत को न मानता हो।
रक्त की नातेदारी अलगाव की विपरीत अवस्था है। अस्पृश्यों की दृष्टि में किसी अन्य समुदाय से रक्त-संबंध को स्थापित करना अलगाव की वर्तमान स्थिति को समाप्त करने के लिए एक और उपाय ही होगा। जब तक वे हिंदू बने रहेंगे, तक तक उनका अलगाव कदापि समाप्त नहीं होगा। हिंदुओं के रूप में उनका अलगाव उन पर आगे और पीछे, दोनों ओर से प्रहार करता है। हिंदू होने के नाते न केवल वे मुस्लिमों और ईसाइयों से अलग हैं, बल्कि वे हिंदुओं और अहिंदुओं, दोनों के लिए भी पराए हैं। इस अलगाव को खत्म करने का एक ही तरीका है। इसका दूसरा कोई तरीका नहीं है। वह यह है कि अस्पृश्य किसी अन्य अहिंदू समुदाय में शामिल हो जाएं और उसके सगे-संबंधी बन जाएं।
यह कोई निरर्थक प्रयास नहीं हैं। इस बात को वे सभी लोग स्वीकार करेंगे, जिन्हें अलगाव ही हानियों और रक्त की नातेदारी के लाभों का ज्ञान व भान है। अलगाव के क्या दुष्परिणाम हैं? अलगाव का अर्थ है, सामाजिक बहिष्कार, सामाजिक अनादर, सामाजिक भेदभाव और सामाजिक अन्याय। अलगाव का अर्थ है, सुरक्षा का अभाव,