336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
न्याय का अभाव, अवसर का अभाव। अलगाव का अर्थ है, सहानुभूति का अभाव, भाईचारे का अभाव, सहृदयता का अभाव। इतना ही नहीं अलगाव का अर्थ है, हिंदुओं की प्रत्यक्ष घृणा और उनका विरोध। दूसरी ओर, यदि अस्पृश्य किसी अन्य समुदाय के साथ रक्त का नाता जोड़ेंगे तो उन्हें उस समुदाय के भीतर बराबर का दर्जा, बराबर की सुरक्षा और बराबर का न्याय मिलेगा। वे उसकी सहानुभूति और उसका सद्भाव प्राप्त कर सकेंगे।
मैं यह कहने का साहस करता हूं कि विरोधियों के प्रश्न का यह सर्वांगपूर्ण उत्तर है। इससे पता चलता है कि धर्म-परिवर्तन से अस्पृश्यों को लाभ मिल सकता है। लेकिन यह वांछनीय है कि मामले पर और आगे विचार किया जाए तथा एक अन्य प्रश्न का निपटारा कर दिया जाए, जिसे धर्म-परिवर्तन के विरोधियों ने अभी तक नहीं उठाया है, पर वे उसे उठा सकते हैं। प्रश्न हैः रक्त-संबंध स्थापित करने के लिए धर्म-परिवर्तन क्यों आवश्यक है?
इस प्रश्न का उत्तर स्वयं मिल जाएगा, यदि इस बात को ध्यान में रखा जाए कि समुदाय और समाज तथा रक्त-संबंध और नागरिकता में अंतर है।
समुदाय शब्द के सही अर्थ में वह रक्त-संबंधियों का समूह होता है। समाज अनेक समुदायों या रक्त-संबंधियों के विभिन्न समूहों का संकलन होता है। समुदाय को जो सूत्र एकसूत्रता में पिरोता है, उसे रक्त-बंधुता कहते हैं और जो सूत्र समाज को एकसूत्रता में पिरोता है, उसे नागरिकता कहते हैं।
समाज में नागरिकता प्राप्त करने के और समुदाय में रक्त-बंधुता प्राप्त करने के साधन एकदम अलग-अलग हैं। नागरिकता देशीयकरण से प्राप्त होती है। नागरिकता की पूर्व शर्त यह है कि राज्य के प्रति राजनीतिक वफादारी को स्वीकार कर लिया जाए। रक्त-बंधुता प्राप्त करने की पूर्व शर्तें नितांत भिन्न हैं। मानव-विकास के एक चरण में रक्त-बंधुता प्राप्त करने की पूर्व शर्त थी, रक्त की समानता। क्योंकि संबंधी वर्ग ऐसे व्यक्तियों का समूह है, जो यह मान्यता है कि वे एक ही पूर्वज के अंशज एवं वंशज हैं और उनकी नसों में एक ही रक्त प्रवाहित हो रहा है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हर समूह वस्तुतः और तथ्यतः एक ही पूर्वज का वंशज है या नहीं। वास्तविकता तो यह है कि समूह अजनबी को संबंधी-वर्ग में शामिल कर लेता था, भले ही वह एक ही पूर्वज की उपज न हो। यह मजेदार बात है कि ऐसा नियम था कि यदि कोई अजनबी सात पीढि़यों तक किसी समूह के साथ अंतर्विवाह करता रहता था तो वह संबंधी-वर्ग का सदस्य बन जाता था। मुद्दा यह है कि भले ही यह किस्सा-कहानी हो, पर संबंधी-वर्ग में शामिल होने की पूर्व शर्त थी, रक्त की समानता।
मानव-विकास के बाद के चरण में रक्त की समानता के स्थान पर धर्म की समानता