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सभ्यता या घोर असभ्यता

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करने वाले दो महारों को दामू और लक्ष्मण को पहचानने के लिए खासतौर

पर बुलाया गया। यह निश्चय कर लेने के बाद कि दामू और लक्ष्मण महार

हैं, उन्हें इसी मास की 11 तारीख की आधी रात को कालूपुर, भंडारी पोल,

में भजन मंडली के लिए बुलाया गया। जब पूछा गया कि वे किस जाति के

हैं, दामू और लक्ष्मण ने उत्तर दिया कि वे सोमवंशी हैं। इस उत्तर से मराठे

क्रुद्ध हो गए। मराठों ने उन्हें जी-भर के गालियां दीं और कहा कि उन्होंने

उनके व्यक्तियों और स्थानों को भ्रष्ट किया है। मराठों ने महार बंधुओं की

ठुकाई व पिटाई की। एक भाई के पास सोने की अंगूठी थी। वह उससे

जबरन छीन ली गई और उसे 11 रुपये में बेच दिया गया। इस रकम में से

छह रुपये उस महार को अदा कर दिए गए, जिसे इन बंधुओं की पहचान के

लिए सूरत से बुलाया गया था। दामू और लक्ष्मण ने मराठों से चिरौरी और

विनती की कि उन्हें उनके घर लौटने दिया जाए। लेकिन मराठों ने कहा कि

वे तभी जा सकते हैं, जब वे 500 रुपये का जुर्माना अदा कर दें। जब महार

बंधुओं ने कहा कि वे इतनी बड़ी रकम तो नहीं दे सकते, तो एक मराठे ने

सुझाव दिया कि महार बंधुओं पर केवल 125 रुपये का जुर्माना किया जाए।

लेकिन एक मराठे ने जुर्माने के सुझाव का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें

केवल जुर्माने से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी जाति छिपाने के

अपराध के लिए महार बंधुओं को कठोर दंड देना चाहिए। ऐसा निर्णय कर

लेने के बाद महार बंधुओं को रोक लिया गया और सबेरे 9 बजे के लगभग

उनका बर्बरतापूर्ण तिरस्कार किया गया। बाईं ओर से उनकी मूंछें और दाईं

ओर से उनकी भौंहें उस्तरे से साफ कर दी गईं। उनके शरीरों पर तेल और

मिट्टी में सनी कालिख पोत दी गई। उनके गलों में पुराने जूतों की मालाएं

डाल दी गईं। उनमें से एक के हाथ में झाडू पकड़ा दी गई। दूसरे के हाथ

में तख्ती पकड़ा दी गई। उस पर लिखा था कि अपराधियों को दंड इसलिए

दिया गया कि उन्होंने उच्च जाति के लोगों को स्पर्श करने का दुस्साहस

किया। महार बंधुओं का जुलूस निकाला गया। कोई 75 लोग उसमें साथ थे।

आगे-आगे ढोल पीटा जा रहा था।

उक्त दोनों महार बंधुओं ने पुलिस से शिकायत की है। अभियुक्त ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि दामू और लक्ष्मण के साथ कथित रीति से बर्ताव किया गया, लेकिन कहा कि शिकायत करने वालों ने स्वेच्छा से दंड भुगतना स्वीकार किया है। जाहिर है कि दामू और लक्ष्मण उस समय असहाय थे, जब उन्हें गालियां दी गईं, मारा व पीटा गया, कठोर दंड की धमकी दी गई और वस्तुतः बर्बरतापूर्वक उनका तिरस्कार किया गया। इस मामले में तथाकथित अस्पृश्य जातियों के लोगों में भारी