356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बीच जब वह सोता रहा तो कंपनी की सेवा ठप्प पड़ी रही। इस प्रकार जो
अत्याचार सामान्यतः फैक्टरी के लिए था, उसका वह भ्रष्ट निजी उपभोग के
लिए विकृत उपयोग करता रहा।
उसे इन आरोपों का दोषी पाया गया।
ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्टरियों में पर्याप्त आपसी कलह था। कंपनी के आढ़तियों ने प्रभु के नियमों और मानवीय गरिमाओं की अवहेलना करते हुए कलंकपूर्ण अत्याचार किए। वे आपस में जानी दुश्मन की तरह लड़े और झगड़े। गाली-गलौज के बाद मारपीट भी हुई। कंपनी के सर्वोच्च पदों पर आसीन लोगों ने शराब के नशे में धुत होकर अपने मातहतों के साथ झगड़ा व फिसाद किया।
निम्न घटना की रिपोर्ट सूरत स्थित कंपनी की फैक्टरी के रिकार्ड से ली गई है ख्1, ः
हम माननीय महानुभावों के पास 21 अगस्त, 1695 से दिसंबर 1696 तक
के अपने परामर्श खाते भेज रहे हैं। इनमें निश्चय ही अध्यक्ष की हत्या का
एक षड्यंत्र दीख पड़ता है। पहरेदारों की हत्या का भी षड्यंत्र था, क्योंकि
वे उसका विरोध करते। सर्वरी वोक्स और अपहिल कहां तक दोषी हैं, इसका
फैसला आप महानुभाव इसे तथा पूर्वोक्त गवाहियों को देखकर करें। ऐसी प्रबल
धारणा है कि पहले मंशा यह थी कि अध्यक्ष के पेट में छुरा घोंपा जाए, पर
एफ्राएम बेन्डाल की सतर्कता के कारण वैसा नहीं हो पाया। जब दुगुनी पहरेदारी
कर दिए जाने के काण उसकी आशा न रही, जो ऐसा लगता है कि विष दिए
जाने की बात सोची गई, जैसा कि एडमंड क्लर्क की गवाही से पता चलता
है। सभी कुछ गोपनीयता के आंचल में बंधा था, क्योंकि पता लगाने वाले पर
ही लानत-मलायत की भीषण बौछार होती और उसी पर समूचा नजला गिरता
और उसका अंत हो जाता।
उसी दस्तावेज में सूरत में कौंसिल के अध्यक्ष के खिलाफ श्री चार्ल्स पियचे की शिकायत दर्ज हैः
आपसे (यानी अध्यक्ष से) मुझे अपने सिर पर दो घाव मिले हैं, एक तो
बहुत लंबा और गहरा है और उसकी तुलना में दूसरा बहुत मामूली है। फिर एक
करारा प्रहार मेरी बाईं भुजा पर किया गया, जिसके कारण मेरा कंधा सूज गया।
फिलहाल उसके कारण मैं अपनी उस भुजा का हिलाडुला नहीं सकता। मेरे दाएं
भाग में छाती के ठीक नीचे मेरी पसलियों पर प्रहार किया गया। उसके कारण
- काये, क्रिश्चियनिटी इन इंडिया, पृ. 106