15. अस्पृश्यों का ईसाईकरण - Page 376

अस्पृश्यों का ईसाईकरण

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कभी भी रोमन प्रभुत्व के अधीन नहीं रहे और कभी भी उन्होंने रोमन सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया।

इस प्रकार दोनों चर्चों के बीच संघर्ष के तत्व मौजूद थे और अन्वेषण ने तो केवल अग्नि में घी का काम किया।

गोआ के अन्वेषण अधिकारियों ने खोज की कि वे विधर्मी थे। फिर क्या था, बाड़े पर खड़े भेडि़ए की भांति पोप के प्रतिनिधि सीरियाई चर्चों पर टूट पड़े। संघर्ष कितना बड़ा था, इसका वर्णन श्री काये ने पूर्वोक्त पुस्तक में किया।

जिसे पहले सीरियाई धर्माधिकारी का पाला रोम के विरोध से पड़ा, उसने साहस और निष्ठा में अपने अभाव का प्रायश्चित अन्वेषण की कालकोठरियों में किया। दूसरे का भी वही हश्र हुआ। तीसरे के कष्ट अधिक सहानुभूति योग्य हैं। अपने धर्म-प्रदेश में काफी कष्ट और क्लेश के बाद उनका निधन हो गया। वह अंत समय तक पोप के प्रभुत्व को नकारते रहे। उनके चर्चों का अब कोई बिशप न था। वह ऐसा समय था, जब उन्हें धर्माधिकारी स्वरूप और समर्थन की पहले से कहीं अधिक उपेक्षा थी, क्योंकि रोम अपना फौलादी पंजा और अपनी लंबी भुजा उनकी ओर फैलाने ही वाला था। डान एलेक्सी डे मेन्जेज को गोआ का मुख्य बिशप नियुक्त किया गया। उसका मिशन था कि अपने धर्म में नए लोगों को शामिल करने की ओर कम ध्यान दिया जाए, पर शामिल किए गए पुराने लोगों को अपने अधीन करने की ओर अधिक ध्यान दिया जाए। वह उत्पीड़न के कार्य में इतने जोर-शोर व जी-जान से जुट गया कि उसके कारण वह निश्चय ही रोम की आंखों का तारा बन गया होगा। अपने एजेंटों की मंद सफलता से खिन्न होकर उसने कर्मचारी वर्ग को अपने हाथ में लेने का निश्चय किया। एक भारी भरकम सैन्य-शक्ति के साथ नीचे दक्षिण की ओर बढ़ते हुए उसने सीरियाई चर्चों को संदेश भेजा कि वे स्वयं को उसके प्राधिकार के आगे समर्पित कर दें। ये चर्च उस समय उप-बिशप के अधीन थे। उसने अपने ऊपर मंडराते हुए खतरे को भांप लिया। उसने अवसर से समझौता करने के साथ-ही-साथ यह दर्शाने का निश्चय किया कि वह प्रतिरोध के लिए तैयार था। उसने मुख्य बिशप से भेंट की। जब वह मेन्जेज से भेंट करने गया तो उसके साथ दृढ-संकल्प वाले तीन हजार लोगों का सुरक्षा दल था। जब सर्वप्रथम मामूली-सी दिखावटी हिंसा का लक्षण दीख पड़ा तो उन्हें बड़ी कठिनाई से रोका गया, ताकि वे अपने प्रतिद्वंदियों पर झपट न पड़ें और अपने धर्म की रक्षा के लिए अपने उफनते उत्साह को सिद्ध न कर दें। यह इस बात का अवसर नहीं था कि मेन्जेज रोम के चर्च के दावों को पुष्ट करता। लेकिन प्रतिरोध का कोई भी भय उसे उसके प्रयोजन से विचलित नहीं कर सका। उसने