अस्पृश्यों का ईसाईकरण
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इन्हीं भाषाओं में प्रापत किया था। यद्यपि साइप्रियन की शैली लैक्टेन्टियस से भिन्न है, फिर भी हम लगभग पता लगा सकते हैं कि ये दोनों लेखक अलंकार-शास्त्र के सरकारी शिक्षक रहे थे। ईसाइयों को दर्शन का भी प्रचुर अध्ययन कराया जाता था, लेकिन सदा ही उसका सर्वाधिक स्वस्थ प्रभाव नहीं पड़ता था। ज्ञान प्रायः श्रद्धा के बजाए धर्मद्रोह पैदा करता था, जो ज्ञान आर्टेमान के अनुयायियों के लिए था, उसका उपयोग उतनी ही कुशलता के साथ उन विभिन्न पंथों के लिए किया जा सकता था, जो धर्मदूतों के अनुयायियों का विरोध करते थे। वे पवित्र धर्मस्थलों के बदलने की धृष्टता करते हैं। वे धर्म के प्राचीन नियम को तिलांजलि देने की धृष्टता करते हैं। वे बाल की खाल निकालने वाले तर्क के सिद्धांतों के अनुसार अपनी राय कायम करने की धृष्टता करते हैं। रेखागणित के अध्ययन के लिए धर्म के विज्ञान की उपेक्षा की जाती है। भूलोक की पैमाइश करते समय वे स्वर्गलोक की अनदेखी करते हैं। यूक्लिड सदैव उनकी मुट्ठी में रहता है। वे अरस्तू और थियोफ्रैस्टस की प्रशंसा करते हैं और वे गैलेन की कृतियों को असाधारण सम्मान देते हैं। उनकी गलतियों का स्रोत है, गैर-ईसाइयों की कला और विज्ञान का दुरुपयोग। वे ईसाई धर्म की निष्कपटता को मानवीय तर्क के परिष्कार से प्रदूषित करते हैं।
न ही सच्चाई की शपथ लेकर यह कहा जा सकता है कि उच्च कुल वालों तथा धन वालों ने सदा ही ईसाई धर्म को स्वीकार नहीं किया। अनेक रोमन नागरिक प्लिनी ने न्यायाधिकरण के सामने पेश किए गए और शीघ्र ही उसे पता चल गया कि बिथीनिया में हर वर्ग के अनेक लोगों ने अपने पूर्वजों के धर्म को तज दिया था। इस प्रकरण में उसकी असंदिग्ध घोषणा की टर्टूल्लियन की साहसिक चुनौती से अधिक श्रेय दिया जा सकता है। प्लिनी अफ्रीका के उप-वाणिज्य दूत को डराता भी है और उससे मानवीयता की भी अपेक्षा करता है तथा उससे दृढ़ता के साथ कहता है कि यदि वह अपने क्रूर इरादों पर अड़ा रहेगा, तो वह कार्थेज का विनाश कर डालेगा और वह पाएगा कि दोषी पाए गए अनेक लोगों में उसके जैसे अनेक लोग, जैसे उदात्त वंश के सीनेटर और मेट्रन तथा उसके अति घनिष्ट मित्रों के मित्र अथवा रिश्तेदार होंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि कोई चालीस वर्षों के पश्चात् सम्राट वैलेरियन को इस दृढ़कथन की सत्यता का विश्वास करा दिया गया, क्योंकि अपने एक शाही फरमान द्वारा वह प्रत्यक्षतः यह मान लेता है कि सीनेटर रोमन नाइट और उच्च कुल की महिलाएं ईसाई पंथ से आबद्ध थीं। चर्च की बाहरी तड़क-भड़क तो अब भी बनी हुई थी, पर उसकी