380 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
II
अतः भारत में ईसाई धर्म की क्या उपलब्धि रही है, यह एक ऐसा उपयुक्त विषय है, जिस पर ईसाई मिशनों तथा अस्पृश्यों, दोनों के ही दृष्टिकोणों से विचार होना चाहिए।
यह निर्विवाद तथ्य है कि ईसाई मिशन भारतवासियों को ‘स्वस्थ देह’ और अपनी शरण में आने वाले को ‘स्वस्थ बुद्धि’ प्रदान करने की चेष्टा कर रहे हैं। यहां भारत में ईसाई मिशनों की संपूर्ण गतिविधियों का वर्णन करना कठिन होगा। मिशनरियों के काम को पांच शीर्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता हैः
(1) बच्चों कि लिए, (2) युवकों के लिए, (3) जनता के लिए, (4) महिलाओं के लिए, और (5) रोगियों के लिए।
कार्य बहुत बड़े पैमाने पर किया गया है। निम्न आंकड़ों से पता चल जाएगा कि शिक्षा और रोजगार के लिए कितने बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है।
I. ईसाई चिकित्सा-कार्य ख्1,
अस्पताल 256
डिस्पेंसरियां 250
सैनीटोरियम 10
कुष्ठाश्रम 38
मैडिकल स्कूल 3
अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 12,000
सैनीटोरियमों में बिस्तरों की संख्या 755
विदेशी डाक्टर 350
राष्ट्रीय डाक्टर 390
विदेशी नर्सें 300
राष्ट्रीय नर्सें 900
छात्रा नर्सें 1,800
बड़े आपरेशन 44,000
जच्चा-बच्चा पर (कुल) 32,000
अंतरंग रोगी 285,000
बाह्य रोगी 2,600,000
भारत, बर्मा और श्रीलंका में।