398 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
का अंग नहीं है, भले ही गलती से अति प्रबुद्ध लोगों ने वैसी धारणा बना ली
है। हिंदुओं को ईसाई बनाते समय उन्हें अपनी जातीय अस्मिता बनाए रखने की
अनुमति दी जानी चाहिए। फिर तो वे भारी संख्या में बिना किसी संकोच के
ईसाई धर्म को अंगीकर कर सकेंगे। ख्1,
लेकिन मैं नहीं चाहता कि ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न के प्रति प्रोटेस्टैंट मिशनों के रवैए की निरख-परख मैं किसी एक व्यक्ति की छुटपुट घोषणा के आधार पर करूं। इस बात का प्रमाण मौजूद है कि एक बार अपने प्रारंभिक कार्यकाल में प्रोटेस्टैंट मिशनों से इस महत्वपूर्ण मसले के बारे में अपनी राय कायम करने के लिए कहा गया था, ताकि कहा जा सके कि प्रोटेस्टैंट मिशन द्वारा मान्य दृष्टिकोण सुविचारित दृष्टिकोण है। जब इस मसले के बारे में गंभीरता से विचार किया गया था तो यह वह समय था, जब मान्यवर हेबर को कलकत्ता का बिशप नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपना पदभार 1823 में संभाला। अपनी धर्माध्यक्षता के दौरान उन्होंने समूचे भारत और श्रीलंका का व्यापक दौरा किया। अपनी यात्रा के दौरान उन्हें पता चला है कि धर्मान्तरितों में जातिप्रथा को सहन किए जाने के प्रश्न के बारे में प्रोटेस्टैंट मिशनरियों के बीच तीव्र मतभेद है। उन्होंने इस मतभेद को दूर करने का फैसला किया। उन्होंने यह कार्य किस प्रकार किया, उसका संक्षिप्त वर्णन श्री काये ने इस प्रकार किया हैः
अतः मिशनरियों के बीच मतभेद था। उसे हेबर दूर करना चाहते थे। बंगाल
छोड़ने से पूर्व यह मसला उनके सामने प्रस्तुत किया गया था। वहां उन्होंने वह
समूची सूचना प्राप्त करने का प्रयास किया, जो वह प्राप्त कर सकते थे। उस
सूचना का संबंध न केवल पूर्ववर्ती प्रोटेस्टैंट मिशनरियों की प्रथा से था, बल्कि
जातिप्रथा के सही स्वरूप से भी था। उस समय बिशप के कालिज में क्रिश्चियन
डेविड नामक एक धर्मान्तरित ईसाई भी था। वह इवार्ट्ज का चेला था और वास्तव
में असाधारण व्यक्ति था। जितना वह पवित्रात्मका था, उतना ही बुद्धिमान भी था।
बिशप महोदय उसे भी एक ऐसा व्यक्ति मानते थे, जिससे संदेहों के निवारण के
लिए पूछताछ करना अति उपयोगी हो सकता था। अतः उन्होंने एक प्रश्नावली
तैयार की और उसे इस देशी ‘क्रिश्चियन’ के पास भेज दिया। उन्हें उत्तरों की
एक माला प्राप्त हुई। उसकी न केवल अंग्रेजी बढि़या थी, बल्कि उसमें ऐसा बल
और यथार्थता थी, जिसे सहज ही लांघा नहीं जा सकता था।
सर्वप्रथम तो जातिप्रथा के स्वरूप के बारे में क्रिश्चियन डेविड ने कहा कि
- कृष्णा डिस्ट्रिक्ट मैनुअल, पृ. 282