400 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अलावा उन्होंने अपने सर्वाधिक श्रद्धेय पूर्ववर्तियों, यानी वयोवद्धृ मिशनरियों के खिलाफ आवाज उठाई और प्रचार किया। उन्होंने अपने पूर्ववर्तियों की निंदा की और कहा कि उन्होंने ‘बाइबिल’ को भ्रष्ट किया है, क्योंकि उन्होंने ऐसी बातों की अनुमति देकर ईसाई धर्म की पवित्रता को भ्रष्ट किया है। इन सब बातों की चर्चा क्रिश्चियन डेविड ने गहन खेद के साथ की। स्वाभाविक यह था कि उनके अपने दृष्टिकोण का झुकाव अपने पुराने गुरु क्रिश्चियन ईवार्ट्ज के सिद्धांत और शैली की ओर था। उनका विचार था कि बिशप का विनम्र हस्तक्षेप और मीठी सलाह युवा मिशनरियों के दिलों को अधिक सहनशीलता और क्षमा की ओर प्रवत्त्ृ कर सकती थी।
बड़ी तत्परता और निष्ठा से हेबर ने इस महत्वपूर्ण विषय का मनन किया। उनके चरित्र के बारे में हम जो जानते हैं, उस सबके आधार पर हम कह सकते हैं कि उनका झुकाव वयोवृद्ध मिशनरियों की अधिक शांतिप्रिय प्रथाओं की ओर रहा होगा। लेकिन उन्होंने अंतिम निर्णय को उस समय तक के लिए टाल दिया जब तक कि और सूचना प्राप्त करने का और मौके पर अधिक ठोस तथा पूर्ण निर्णय देने का अवसर न आ जाए। अतः जब उन्होंने सदर्न प्रेसिडेंसी का दौरा किया तो उन्होंने पूछताछ के लिए कुछ प्रमुख मिशनरियों को पत्र लिखे और विषय के बारे में और छानबीन के लिए ‘क्रिश्चियन नालेज सोसाइटी’ की एक प्रवर समिति का गठन किया। श्रद्धेय डी. श्रीवोगेल को लिखे गए एक पत्र से, जो प्रश्नमाला जैसा ही है, उनके दृष्टिकोण के झुकाव को आंका जा सकता है। काफी चिंतन-मनन के बाद उन्हें लगा कि समुद्र तट पर बसे ईसाई धर्मान्तरितों के बीच जातिप्रथा जिस रूप में विद्यमान है, वह वस्तुतः एक ऐसी प्रथा है, जो ईसाई देशों में प्रचलित सामाजिक अलगाव से कुछ सारतः भिन्न है। उन्होंने स्वयं से पूछा कि क्या यूरोप में जातिप्रथा जैसी कोई चीज नहीं है? क्या अमरीका में जातिप्रथा जैसी कोई चीज नहीं है? क्या हमारे अंग्रेजी चर्चां में उच्च वर्ग तथा निम्न वर्ग अलग-अलग नहीं बैठते? क्या हमारे सजे-संवरे उच्च वर्ग के लोग परम प्रसाद पाने के लिए पहले वेदी पर नहीं जाते? क्या हमारे उच्च तथा निम्न वर्ग के लोग सहभोज करते हैं? क्या उनके बच्चे एक ही स्कूलों में पढ़ते हैं? क्या हमारे बीच कोई पेरिया नहीं है? क्या अन्य सभ्य देशों में लौकिक भेदभाव के सभी विचारों के अलावा जातीय उच्चता की भावना प्रचलित नहीं है? क्या स्पेन का शिष्ट-जन अपने फटे-पुराने लबादे के नीचे शान से अपने जातीय गौरव को धारण नहीं करता? क्या सर्वाधिक धनवान मुलट्टों (संकर नीग्रो) सर्वाधिक निर्धन श्वेत का उपयुक्त साथी है? चाहे हम उसे रक्त कहें या कोई और नाम