2. वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सकता है। जब वे सात वर्ष के होते हैं तो अपने कंधे पर बिना कमाई खाल की दो अंगुल चौड़ी पट्टी धारण करते हैं। यह पट्टी एक जंगली पशु की खाल की होती है, जिसको क्राइवामृगम कहते हैं और वह जंगली पशु गधे जैसा होता है। तब वह सात वर्ष तक पान नहीं खा सकता। इस पूरी अवधि के बीच वह इस पट्टी को पहने रहता है। जब वह 14 वर्ष का हो जाता है तो वे उसे ब्राह्मण की दीक्षा देते हैं। वे उसकी चमड़े की पट्टी उतार देते हैं और उसे तीन सूत्रों वाला धागा (यज्ञोपवीत) पहना देते हैं। उसे वह आजन्म धारण करता है और वह उसके ब्राह्मण होने का प्रमाण-पत्र होता है। इस रस्त को वे बड़ी धूमधाम और उल्लास से करते हैं, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार हम उस पादरी के लिए करते हैं, जो पहले-पहल अपना मास (ईसाई पर्व विशेष) गाता है। उसके बाद वह पान खा सकता है, लेकिन मांस व मछली नहीं खा सकता। भारतीयों में उनका बड़ा आदर व सम्मान होता है, जैसा कि मैं बता चुका हूं कि वे, चाहे कोई भी अपराध करें, सर्वथा अबध्य होते हैं। उनका अपना प्रधान ही उन्हें छोटा-मोटा दंउ दे देता है। हमारी भांति वे केवल एक बार शादी करते हैं, और केवल सबसे बड़ा पुत्र ही शादी कर सकता है, वह घर का प्रधान समझा जाता है, जैसे वह किसी छोटी-मोटी रियासत का मालिक हो। अन्य भाई आजन्म अविवाहित रहते हैं। ये ब्राह्मण अपनी पत्नियों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन्हें पूर्ण सम्मान देते हैं। कोई अन्य व्यक्ति उनके साथ संभोग नहीं कर सकता। यदि उनमें से किसी की पत्नी मर जाती है तो वह पुनर्विवाह नहीं करता। लेकिन कोई स्त्री अपने पति के साथ विश्वासघात करती है तो उसे विष देकर मार दिया जाता है। जो भाई अविवाहित होते हैं, वे नायर स्त्रियों के साथ संभोग करते हैं। वे इसे अति सम्मानजनक समझती हैं, और चूंकि वे ब्राह्मण होते हैं, अतः कोई भी स्त्री अस्वीकार नहीं करती। फिर भी वे उम्र में अपने से बड़ी स्त्री के साथ संभोग नहीं करते। वे अपने-अपने घरों और नगरों में रहते हैं, और मंदिरों में पुजारी का काम करते हैं। वहां वे दिन की निश्चित अवधि मे प्रार्थना-पूजा और मूर्तियों का अभिषेक करते हैं।

इनमें से कुछ ब्राह्मण राजाओं की हर प्रकार से सेवा करते हैं, लेकिन वे युद्ध नहीं करते। राजा के लिए भोजन केवल ब्राह्मण या उसका संगा-संबंधी ही तैयार कर सकता है। वे दूत का भी काम करते हैं। वे अन्य देशों को पत्र, धन और माल लाने ले-जाने का काम करते हैं। वे जहां भी चाहें बेखटके और बेखौफ आ-जा सकते हैं। कोई भी उनको क्षति नहीं पहुंचाता है, तब भी नहीं जब राजा युद्ध के लिए चला जाता है। वे ब्राह्मण मूर्तिपूजा में पारंगत होते हैं और इस संबंध