वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया
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में उनके पास अनेक ग्रंथ होते हैं। राजा इन ब्राह्मणों का बड़ा सम्मान करते हैं।
मैं अनेक बार नायरों की चर्चा कर चुका हूं, फिर भी मैंने अभी तक नहीं बताया है कि उनके तौर-तरीके क्या हैं। मलाबार के इस प्रदेश में नायर लोगों की एक और जाति है। उनमें उदात्त लोग होते हैं। युद्ध में भाग लेना ही उनका एकमात्र धर्म व कर्म है। जहां कहीं वे जाते हैं, वे सदा ही हथियारों से लैस रहते हैं। कुछ के पास तलवार और ढाल होती हैं। कुछ के पास तीर-कमान होते हैं, और कुछ के पास भाले होते हैं। वे सभी राजा और अन्य बड़े-बड़े सामंतों के साथ रहते हैं, लेकिन सभी को वेतन राजा से या उन बड़े-बड़े सामंतों से मिलता है, जिनके साथ वे रहते हैं। केवल नायर वंश का व्यक्ति ही नायर हो सकता है। अपनी उदात्त मर्यादा में वे निष्कलंक होते हैं। वे निम्न जाति के किसी व्यक्ति को स्पर्श नहीं करते। वे खाएंगे भी तो नायर के साथ, और पिएंगे भी तो नायर के साथ।
वे लोग विवाह नहीं करते। उनके भानजे (बहन के पुत्र) उनके उत्तराधिकारी होते हैं। उच्च कुल की स्त्रियां बड़ी स्वच्छंद प्रकृति की होती हैं और अपनी इच्छा से ब्राह्मण या नायर के साथ संभाग करती हैं। लेकिन मृत्यु के भय से वे अपने से किसी नीची जाति के व्यक्ति के साथ संभोग नहीं करतीं। जब लड़की बारह वर्ष की हो जाती है तो उसकी माता बड़ा उत्सव मनाती है। जब कोई माता देखती है कि उसकी पुत्री ने उक्त आयु प्राप्त कर ली है तो वह अपने सगे-संबंधियों तथा मित्रों से अपनी पुत्री के विवाह की तैयारी करने के लिए कहती है। वह अपने कुल या किसी विशिष्ट के यहां अपनी पुत्री से विवाह करने के लिए प्रस्ताव भेजती है। इस पर वह सहर्ष स्वीकृति देता है। वह एक छोटा-सा आभूषण बनवाता है, जिसमें आधी अशरफी-भर सोना होता है। वह माला की तरह होता है। इस आभूषण के बीचों-बीच एक छेद होता है। उसमें सफेद रेशम के धागे की डोरी पड़ी होती है। तब माता किसी नियत तिथि को अपनी पुत्री को अनेक मूल्यवान आभूषणों से खूब सुसज्जित करती है। उसके यहां
खूब नाच-गाना होता है। लोग भारी संख्या में एकत्र होते हैं। तब उक्त कुल का कोई सगा-संबंधी या मित्र उस आभूषण के साथ आता है और कुछ रस्में पूरी करके उस लड़की के गले में पहना देता है, जिसे वह प्रतीक के रूप में जीवन-भर पहनती है, और उसका विवाह हुआ समझा जाता है। यदि वह मां का सगा-संबंधी होता है, तब वह उस लड़की के साथ संभोग किए बिना वापस जाता है। यदि वह सगा-संबंधी नहीं होता, तब वह उस लड़की के साथ संभोग कर सकता है, लेकिन वह वैसा करने के लिए बाध्य नहीं होता। उसके बाद माता खोज करती है और किसी युवक से अपनी पुत्री के कौमार्य को भंग करने का अनुरोध करती है। उसे नायर ही होना