36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चाहिए। वे स्वंय किसी अन्य महिला के कौमार्य को भंग करना अपमानजनक और गंदा समझते हैं। जब कोई व्यक्ति एक बार उसके साथ संभोग कर लेता है तो फिर वह पुरुषों के साथ सहवास करने योग्य हो जाती है। तब माता अन्य युवा नायरों से पूछताछ करती है कि क्या वे उसकी पुत्री का भरण-पोषण करना चाहते हैं? क्या वे उसे अपनी गृहणी के रूप में स्वीकार करना चाहते हैं, ताकि तीन-चार नायर उसके साथ जीवन-यापन के लिए तैयार हो जाएं और हर व्यक्ति से प्रतिदिन भरण-पोषण के लिए राशि मिलती रहे। जितने अधिक प्रेमी होते हैं, वह उतना ही अधिक उसके लिए सम्मानजनक होता है। प्रत्येक का समय नियत कर दिया जाता है। प्रत्येक के साथ एक दिन दोपहर से अगले दिन दोपहर तक समय बिताता है। इस प्रकार वे शांति से रहने लगते हैं। किसी प्रकार की अशांति या लड़ाई-झगड़ा नहीं होता। यदि उनमें से कोई उसे छोड़ना चाहता है तो वह उसे छोड़ देता है और दूसरी के साथ रहने लगता है। वह भी यदि किसी पुरुष से ऊब जाए तो वह उससे चले जाने के लिए कह देती है और वह चला जाता है या उससे समझौता कर लेता है। यदि उनसे कोई बच्चे पैदा हो जाएं तो वे माता के साथ रहते हैं और माता को उनका लालन-पालन करना पड़ता है, क्योंकि वे उन्हें किसी की भी संतान नहीं मानते। यदि उनमें से उनकी शक्ल मिलती-जुलती है, जो भी वे उन्हें अपनी संतान नहीं मानते। न ही वे उनकी जायदाद के उत्तराधिकारी होते हैं। जैसा कि मैं बता चुका हूं, उनके उत्तराधिकारी उनके भानजे, यानी उनकी बहन के पुत्र होते हैं। (जो भी अपने मन के भीतर झांक कर देखेगा तो उसे पता चलेगा कि इस नियम की स्थापना के पीछे आम आदमी की समझ से कहीं बड़ा और गहरा अर्थ था)। उनका कहना है कि नायरों के राजाओं ने वह नियम इसलिए बनाया कि कहीं बच्चों के लालन-पालन के फेर में पड़कर वे उनकी सेवा सेवा से विमुख न हो जाएं।
मलाबार के इस राज्य में बियाबरे नामक एक और जाति भी है। वे भारतीय व्यापारी हैं और इस प्रदेश के मूल निवासी हैं। जब विदेशी लोग समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे थे, उससे भी पूर्व वे वहां थे। चाहे बंदरगाह हो या देश का भीतरी भाग, वे दोनों स्थानों पर हर प्रकार के माल का व्यापार करते हैं। जहां उन्हें अधिक-से-अधिक मुनाफा मिलता है, वहां वे व्यापार करते हैं। वे काली मिर्च और अदरक थोक में नायरों और काश्तकारों से एकत्र कर लेते हैं। अक्सर वे नई फसलें तैयार होने से पूर्व ही खरीद लेते हैं और बदले में सूती कपड़े और अन्य चीजें दे देते हैं, जो वे बंदरगाहों पर रखते हैं। बाद में वे खरीदे गए माल को पुनः बेच देते हैं और भारी मुनाफा कमाते हैं। उनके कुछ विशेषाधिकार होते हैं, जैसे कि वे जिस देश में रहते हैं, उसका राजा भी उन्हें कानून द्वारा प्राण-दंड