2. वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हैं। वे महान ज्योतिषी होते हैं और भविष्य के बारे में सच्ची भविष्यवाणियां करते हैं। इस प्रयोजन के लिए कुछ सामंत उनका भरण-पोषण करते हैं।

आगिरिस नामक एक और मूर्तिपूजक छोटी जाति भी है। वे राज-मिस्त्री, बढ़ई, लुहार, धातुकर्मी होते हैं। उनमें से कुछ सुनार भी होते हैं। वे सब एक ही कुल-गोत्र के होते हैं। उनकी अलग जाति है और उनके देवता अन्य लोगों से अलग होते हैं। वे विवाह करते हैं। उनके उत्तराधिकारी उनके बेटे होते हैं और वे अपने पिता का व्यवसाय सीखते हैं।

इस प्रदेश में मोगेरे नामक एक और भी छोटी जाति होती है। वे लगभग तिय्या जैसे होते हैं, लेकिन वे एक-दूसरे को स्पर्श नहीं करते। जब राजा एक स्थान से दूसरे स्थान को जाता है तो वे उसका सामान ढोते हैं, लेकिन इस प्रदेश में अब वे इने-गिने ही रह गए हैं। उनकी अलग जाति होती है। विवाह संबंधी उनका कोई कानून-कायदा नहीं होता। उनमें से अधिकांश समुद्र से अपनी जीविका चलाते हैं। वे नाविक होते हैं। उनमें से कुछ मछेरे भी होते हैं। उनकी कोई मूर्तियां नहीं होतीं। वे नायरों के भी दास होते हैं।

इनसे भी एक छोटी जाति होती है, जिन्हें मनकुअर कहते हैं। वे मछेरे होते हैं। इसके अलावा वे और कोई धंधा नहीं करते। फिर भी उनमें से कुछ मूरों तथा अन्य मूर्तिपूजकों के जहाजों में काम करते हैं और वे अति कुशल नाविक होते हैं। यह जाति बड़ी निर्दयी होती है। वे निर्लज्ज चोर होते हैं। वे विवाह करते हैं और उनके पुत्र उनके उत्तराधिकारी होते हैं। उनकी स्त्रियां बदचलन होती हैं। वे किसी से भी यौन संबंध स्थापित कर लेती हैं और उसे बुरा नहीं माना जाता। उनकी अपनी अलग मूर्तिपूजा होती है।

मलाबार के इस प्रदेश में इनसे भी निम्न स्तर की एक और मूर्तिपूजक जाति होती है। उसको बेटुन कहते हैं। वे नमक बनाते हैं और धान की खेती करते हैं। उसके अलावा वे कुछ नहीं करते।

वे सड़कों से दूर खेतों में अलग-थलग घरों में रहते हैं। वहां सभ्य-जनों का आना-जान नहीं होता। उनकी अपनी अलग मूर्तिपूजा होती है। वे राजाओं और नायरों के गुलाम होते हैं और बड़े गरीब होते हैं। वे नायरों से काफी फासले पर चलते हैं और नायर उनसे काफी दूरी से बात करते हैं। उनका अन्य जातियों से कोई संपर्क नहीं होता।

इनसे भी निम्न स्तर की और असभ्य एक और मूर्तिपूजक जाति होती है, जिन्हें पाणीन कहा जाता है। वे बड़े कुशल जादू-टोने वाले ओझा होते हैं। वे