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वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया

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है। जिन नियमों के उल्लंघन के लिए कठोरतम प्रायश्चित का विधान है, उन्हें जाति का ‘तन’ कहा जा सकता है। अतः बिना किसी संकोच के कहा जा सकता है कि जाति के चार बुनियादी नियम हैं। जाति की परिभाषा इस प्रकार की जा सकती है कि वह एक ऐसा समाज-समूह है, जिसकी (क) हिंदू धर्म में आस्था हो, और जो (ख) विवाह, (ग) खान-पान, और (घ) व्यवसाय संबंधी कतिपय नियमों से आबद्ध हो। इसमें एक और विशेष लक्षण जोड़ा जा सकता है, यानी वह ऐसा समाज-समूह हो, जसका एक समान नाम हो।

विवाह के संबंध में यह नियम है कि विवाह केवल अंतर्जातीय होना चाहिए। विभिन्न जातियों के बीच विवाह नहीं हो सकते। यह वह सबसे बड़ा तथा सर्वाधिक बुनियादी आधार है, जिस पर जाति का समूचा ताना-बाना और ढांचा टिका हुआ है।

खान-पान के संबंध में नियम है कि कोई व्यक्ति जाति से बाहर के किसी व्यक्ति से न तो भोजन ले सकता है और न ही उसके साथ बैठकर भोजन कर सकता है। इसका अर्थ है कि जो लोग आपस में शादी कर सकते हैं, केवल वे ही साथ बैठकर भोजन भी कर सकते हैं। जो आपस में शादी नहीं कर सकते, वे एक-दूसरे के साथ बैठकर भोजन नहीं कर सकते। दूसरे शब्दों में, जाति एक अंतर्जातीय इकाई भी है और एक सांप्रदायिक इकाई भी।

व्यवसाय के संबंध में नियम है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का परंपरागत व्यवसाय ही करेगा, और यदि किसी जाति का कोई व्यवसाय नहीं है तो उसे अपने पिता का व्यवसाय करना होगा।

जहां तक किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति का संबंध है, वह निश्चित और वंशानुगत होती है। वह स्थाई होती है, क्योंकि व्यक्ति की सामाजिक स्थिति का निर्धारण उसकी जाति की सामाजिक स्थिति के अनुसार होता है। वह वंशानुगत है, क्योंकि हिंदू पर उसके माता-पिता की जाति का ठप्पा लगा होता है। हिंदू अपनी सामाजिक स्थिति नहीं बदल सकता, क्योंकि वह अपनी जाति नहीं बदल सकता। हिंदू जन्म से हिंदू होता है, और मरने पर भी वह उसी जाति का रहता है, जिसमें उसका जन्म हुआ था। अगर कोई हिन्दू अपनी जाति से च्युत हो जाता है, तो वह अपनी सामाजिक स्थिति से भी च्युत हो जाता है। वह नई या कोई बेहतर अथवा भिन्न सामाजिक स्थिति प्राप्त नहीं कर सकता।

जाति के संबंध में एक समान नाम का क्या महत्व है? इसका महत्व स्पष्ट हो जाएगा, यदि हम दो प्रश्न करें। वे अति संगत भी हैं और जाति नामक इस संस्था का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनका सही उत्तर जरूरी है। समाज में वर्ग या