वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया
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के कारण किसी जाति के लिए अपने नियमों का सिक्का चलाना आसान हो जाता है। यह काम दो प्रकार से सरल हो जाता है। एक तो यह कि उपनाम के रूप में जाति का नाम आगे लगे होने से वह किसी अन्य जाति को नहीं अपना सकता और जाति के घेरे में बंधा रहता है। दूसरे, इससे अपराधी और उसकी जाति को पहचानने में और जाति के नियमों को तोड़ने के लिए उसे आसानी से पहचान कर दंडित करने में आसानी होती है।
यह है, जाति का अर्थ। अब जाति-व्यवस्था के बारे में कहूंगा। इसके लिए जरूरी है कि विभिन्न जातियों के आपसी संबंधों का अध्ययन किया जाए। जाति-समूह की दृष्टि से देखा जाए जो जाति-व्यवस्था ऐसे अनेक खास लक्षण प्रस्तुत करती है, जो तुरंत ध्यान आकर्षित करते हैं। सर्वप्रथम तो यह कि विभिन्न जातियों के बीच वह आपसी संबंध नहीं होता, जो व्यवस्था का आधार होता है। हर जाति अलग व थलग है। अपने आंतरिक मामलों को निपटाने तथा जातीय विनियमों को लागू करने में वह स्वाधीन और संप्रभु है। जातियां परस्पर रहती हैं, पर वे एक-दूसरे में प्रवेश नहीं करतीं। दूसरा लक्षण एक जाति के संदर्भ में दूसरी जाति के अनुक्रम से संबंधित है। यह अनुक्रम सम स्तर का नहीं, ऊपर-नीचे का है।
हम कह सकते हैं कि जातियों का दर्जा समान नहीं है। उनका दर्जा असमानता पर आधारित है। एक जाति दूसरी जाति की तुलना में ऊची अथवा नीची है। कोई जाति सर्वोच्च है तो कोई सबसे नीची है। फिर इनके बीच की जातियां है। उनमें भी कोई किसी से ऊंची और किसी से नीची है। इस प्रकार जाति-व्यवस्था में एक अनुक्रम है। उसमें सर्वोच्च और निम्नतम को छोड़कर हर जाति दूसरी जाति से ऊंची और बड़ी है।
इस पूर्वता और श्रेष्ठता का निर्णय कैसे किया जाता है? उच्चता, बड़प्पन या अधीनता के क्रम का निर्णय वे नियम करते हैं, जो (1) धार्मिक संस्कारों से, और (2) सहभोजिता से संबंधित हैं।
पूर्वता के नियमों का आधार धर्म स्वयं तीन प्रकार से उजागर होता है। एक, धार्मिक संस्कारों के द्वारा, दो, धार्मिक समारोहों से जुड़े मंत्रों द्वारा, और तीन, पुजारी की स्थिति के द्वारा।
सबसे पहले पूर्वता क्रम के नियमों के स्रोत धार्मिक संस्कारों को लें। यह उल्लेखनीय है कि हिंदू धर्मग्रंथों में सोलह धार्मिक संस्कारों का विधान है। भले ही वे हिंदू संस्कार हैं, पर प्रत्येक हिंदू जाति यह अधिकार नहीं कर सकती कि वह सभी सोलह संस्कार कर सकती है। केवल कुछ ही यह अधिकार का दावा कर सकती