2. वह समाज जिसे हिंदुओं ने बनाया - Page 67

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

d
lo.kZ fganw
lo.kZ tkfr;ka
x
lo.kZ fganw
lo.kZ tkfr;ka
Ä
lo.kZ fganw
lo.kZ tkfr;ka
N
IkzFke oxZ
mPp tkfr ds
f}t&czkã.kksa] {kf=k;ksa
oS';ksa ds rhu o.kksZa
ls mRiUu tkfr;ka
f}rh; oxZ
fuEu tkfr
ds 'kwnz&pkSFks o.kZ
vFkkZr~ 'kwnzksa ls
mRiUu tkfr;ka
r`rh; oxZ
vkfn tkfr;ka
tjk;e&is'kk tkfr;ka
prqFkZ oxZ
vLi**`**';

ख घ च ज

अंग्रेजी की मूल पांडुलिपि में इस डायाग्राम को खाली छोड़ रखा है - संपादक।

यह डायाग्राम हिंदुओं की वर्ग, जाति-व्यवस्था को प्रस्तुत करता है। इसमे उनके सामाजिक संगठन को सही तथा पूरी तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई है। वह उसके अनेक महत्वपूर्ण लक्षणों को प्रस्तुत करता है। इसमें यह स्पष्ट होता है कि हिंदुओं की दो शाखाएं हैंः (1) सवर्ण हिंदु, और (2) अवर्ण हिंदू। प्रथम शाखा अर्थात् सवर्ण हिंदुओं में जातियों के दो वर्ग हैंः (1) द्विजों का, और (2) शूद्रों का। दूसरी शाखा अर्थात् अवर्ण हिंदुओं में जातियों के दो वर्ग हैंः (1) आदिम और जरायम-पेशा जातियों का, और (2) अस्पृश्य जातियों का। दूसरी बात यह है कि हर जाति का एक घेरा होता है और वह बाकी से अलग होती है। यह बात डायाग्राम में नहीं दर्शाई गई है। जातियों के चारों वर्गों में से हरेक का समूह है और उसे एक घेरे