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हिंदू समाज की आधार-शिला

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नहीं भेजा जाता था। इन परिस्थितियों में वह जीवित होते हुए भी मृत समझ लिया जाता है। हिंदू विधि में ऐसे लोगों के लिए तर्पण करने की व्यवस्था है, मानों ये प्रेत हों। दंड देने की यह व्यवस्था जो अत्यंत अपमानजनक और दमनकारी थी, प्रचीन विधि के अधीन लागू की जाती थी। जो भी उससे बच निकलने की कोशिश करता था, उसे वैसा ही दंड भोगना पड़ता था। लेकिन वर्तमान में प्रारंभ से ही यह दंड नरम कर दिया गया। यह कहा गया है कि ‘केवल पापी ही अपने पाप का दंड भोगेगा।’ अब कानून बहिष्कार की इस प्रणाली को इतना गलत समझता है कि यदि कोई व्यक्ति, जिसे दूसरे व्यक्ति के साथ बैठकर भोजन करना चाहिए, भोजन करने से इंकार कर दें और उसका कोई पर्याप्त कारण न हो तो वह दंडनीय होगा। बंबई की रिपोर्टों में जाति से दुर्भावना से बहिष्कार के लिए हर्जाने के दावे की एक घटना का उल्लेख है। हिंदू कानून जिसे जातिच्युत कहता है और जाति से निष्कासन, जैसा कि पहले हम लोगों में प्रचलित था, ये दोनों दंड प्रकृति और प्रभाव की दृष्टि से एक-दूसरे के समान तो हैं, लेकिन विशिष्ट परिस्थिति में इनमें अंतर है। हमारे यहां की तरह हिंदुओं में अपराध को ध्यान में रखते हुए कहीं दंड कम है और कहीं अधिक है, जैसा कि दायभाग के मामले में है। हमारे सामने 1814 में बंगाल की सदर दीवानी अदालत का एक केस है। जब इस केस के बारे में सरकारी पंडितों से राय ली गई, तब उन्होंने ऐसे मामलों में जिसमें किसी व्यक्ति को आंशिक और अस्थाई रूप में जाति से पदावनत कर दिया जाता है और उन मामलों में जिनमें बाद में जाति ही छिन जाती है, भेद निर्धारित किया। उनका विचार था कि पहली यानी आंशिक पदावनति की स्थिति में जब अपराध का प्रायश्चित कर लिया जाता है तो उत्तराधिकार की बाधा दूर हो जाती है, लेकिन दूसरी स्थिति में जहां पदावनति सदा के लिए होती है, तब भले ही अपराध का पाप प्रायश्चित से दूर हो जाए, पर उत्तराधिकार की बाधा बनी रहती है, क्योंकि जिस व्यक्ति को अंतिम रूप से जाति से बहिष्कृत कर दिया जाए, वह सदा-सर्वदा के लिए बहिष्कृत (पतित) ही रहेगा। उल्लिखित केस में विचाराधीन पक्ष पर आरोप था कि उसने अनेक बार लंपटता और निर्लज्जता का आचरण किया, उसने बेशर्मी से मादक पेयों की लत पाल ली, उसने सर्वाधिक नीच और सर्वाधिक कुख्यात चरित्र के लोगों के साथ कुसंगति और खान-पान किया, उसने अलग-अलग समय पर कई व्यक्तियों के साथ मनमाने ढंग से मार-पीट कर उन्हे आहत किया, उसने खुले आम मुस्लिम महिला के साथ सहवास किया और उसने अपनी माता के, जिसने उसे गोद लिया था, निवास स्थान को न केवल आग