3. हिंदू समाज की आधार-शिला - Page 77

62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लगा दी, बल्कि उससे पूर्व अन्य उपायों से उसे एक से अधिक बार बर्बाद करने का भी प्रयास किया। पंडितों ने कहा, शियन्नाध के विरुध जो अपराध सिद्ध हो चुके हैं, उन सब में से केवल एक, यानी उसने मुस्लिम महिला के साथ जो सहवास किया, ऐसा अपराध है जो उसे दंड का पात्र बनाता है कि उसे सदा-सर्वदा के लिए अपनी जाति से बहिष्कृत कर दिया जाए। और यह थी अदालत की राय। सबसे पहली बात तो यह है कि पदावनत करने की शक्ति संबंधित जाति की पंचायत के पास होती है। यदि उनकी सजा को चुपचाप स्वीकार न किया जाए तो सम्राट के न्यायालय में अपील की जा सकती है। यहां इस केस में दायभाग के दावे का सवाल उठा और यह पता चला कि पंचायत अनेक मामलों में अपनी शक्ति का प्रयोग कर दोषी व्यक्ति को सेंसर कर सकती है, जिनमें कानून कुछ भी नहीं कर सकता। अपराधी को दंड केवल उन अपराधों के लिए दिया जा सकता है, जो उसने अपनी वर्तमान अवस्था में किए हों और जहां अपराध घटिया हो तो उसके दंड का औचित्य तभी होगा, जब वह बार-बार किया जाए। पदावनित बहिष्कार के अन्य कारणों से इस दृष्टि से भिन्न है कि उसका प्रभाव उसके पुत्र पर पड़ता है, जो अपने पिता द्वारा अपराध करने के बाद पैदा होता है। यदि उसका जन्म पहले हुआ हो तो वह दायभाग का अधिकारी बना रहेगा और वह दायभाग अपने पिता के निधन के बाद प्राप्त करता है। बहिष्कार के हर अन्य मामले में पुत्र, यदि वस्तुतः अपने पिता की तरह संकट में नहीं है तो उत्तराधिकार प्राप्त करता है और उसका पालन-पोषण करता है, वह अधिकार पड़पोते तक बना रहता है। पिता अथवा स्वयं अपराधी के संबंध में अगर दायभाग का अधिकार प्राकृतिक दोष के कारण नहीं छिनता है, तब संपत्ति के बंटवारे का प्रश्न संपत्ति के विभाजन से पूर्व उठता है। अगर वह उसके बाद उठता है तो उसके कारण उत्तराधिकार नहीं छिनेगा। पति के द्वारा धर्म-परिवर्तन करने पर अगर पत्नी जारकर्म करती है, तब दायभाग का उसका अधिकार नहीं रहेगा। यदि उसे मिल भी गया हो तो भी छिन जाएगा। इस संबंध में हिंदू विधवा की स्थिति हमारी विधवाओं जैसी होती है। अधिकांश मामलों में उनकी स्थिति पट्टेदार जैसी होती है। वे उसे तभी धारण करती हैं, जब तक वे सदाचारिणी रहें। एक अति श्रद्धायोग्य व्यक्ति के मत के अनुसार, यदि जाति से बहिष्कार ऐसा हो कि उसका प्रायश्चित और उसकी क्षतिपूर्ति न हो सके तो वह अधिकार जब्त कर लिया जाता है। सामान्यतः अयोग्यता का कानून स्त्री और पुरुष, दोनों पर समान रूप से लागू होता है।