3 समझौता - साम्राज्यवादी प्रबंध रहित साम्राज्यवादी वित्त व्यवस्था - Page 116

समझौता

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परिषद् को इस मंत्रिमंडल का स्वरूप दे दिया गया, जिसका मुखिया गवर्नर-जनरल बनाया गया। इस परिवर्तन के माध्यम से ‘‘चांसलर ऑफ एक्सचेकर’’ (वित्त मंत्री) का पद बनाया गया जिस पर विख्यात वित्तशास्त्री जेम्स विल्सन की नियुक्ति की गई। श्री विल्सन ने सबसे पहले वित्तीय प्रशासन को सुधारने पर अपना ध्यान केन्द्रित किया। भारत में एक सार्वभौम खाता प्रणाली शुरू करने, नागरिक तथा सेना लेखा परीक्षा विभाग को केन्द्रीकृत करने, और विनियोग बजट की शुरुआत करने का श्रेय श्री विल्सन को ही जाता है। राजस्व कानूनों को बेहतर बनाया गया और कार्यकुशल प्रशासन के माध्यम से फिजूल खर्ची पर रोक लगाई गईं साथ ही खर्चों ख्1, में कटौती की नीति को भी अपनाया गया। बजट और लेखा परीक्षा संबंधी नियमों को इस तरह का बनाया गया ताकि ‘‘प्रत्येक स्थानीय सरकार के मुखिया या प्रशासन की प्रत्येक शाखा को पहले से अधिक स्वविवेकात्मक शक्ति मिल गई....।’’ ख्2, खर्चो में कटौती इस हद तक लागू की गई कि 1854 में देश भर में शिक्षा का प्रसार करने संबंधी भारत सचिव के आदेश जारी होने के तुरंत बाद ही शिक्षा पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी पर रोक लगा दी गई। ख्3,

लेकिन वित्तीय बेहतरी के लिए किए गए इन तमाम उपायों के बावजूद भारत की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं आ पाया। वित्तीय स्थिति का निचोड़ पेश करते हुए श्री विल्सन महोदय ने 1860-61 के अपने वित्तीय वक्तव्य में कहाःµ

‘‘पिछले तीन वर्षों में हमारा घाटा 30,547,488 पौंड तक पहुंच चुका है, अगले वर्ष 6,500,000 पौंड घाटे की संभावना है, हम कर्ज में 38,410,755 पौंड की वृद्धि कर चुके हैं।’’

इस वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए श्री विल्सन को स्टाम्प ड्यूटी बढ़ानी पड़ी, बाह्य सीमा कर को दुगना करना पड़ा और लोगों की आय पर कर लगाना पड़ा। जो पहले कभी नहीं लगाया गया था। लेकिन इन तीन प्रकार के करों से उगाही गई राशि भी श्री विल्सन के उत्तराधिकारी श्री सैमुअल लैंग को संतुष्ट नहीं रख सकी। उन्होंने भी 1861-62 के अपने वित्तीय वक्तव्य में घाटे की पूर्ति करने तथा अतिरिक्त राशि से बाकी दिन चैन से काटने के लिए 500,000 पौंड की मांग की। कुछ वर्षों तक देश के वित्तीय हालात ठीक रहे। लेकिन तत्पश्चात् 1866 में श्री

  1. 24 नवम्बर, 1860 के कलकत्ता गजट के परिशिष्ट में प्रकाशित, 19 नवम्बर, 1860 के वित्त विभाग के

प्रस्ताव संख्या 126 से, पृष्ठ 35

  1. वही, पैरा 20

  2. 14 अगस्त, 1858 के कलकत्ता गजट, पृष्ठ 1642 की अधिसूचनाएं।