3 समझौता - साम्राज्यवादी प्रबंध रहित साम्राज्यवादी वित्त व्यवस्था - Page 120

समझौता 105

परिस्थितियों में इसे वापस भी लिया जा सकता था। साथ ही जरूरत पड़ने पर बिना किसी विरोध या वाद-विवाद के इसे फिर से लगाया जा सकता था।’’ ख्1,

श्री विल्सन के उत्तदाधिकारी श्री लैंग ने योजना को ज्यादा सही स्वरूप प्रदान किया। सन् 1861-62 का उनका बजट स्थानीय सरकारों द्वारा उपयोगी जन-सुविधाओं की मांग से पैदा हुए घाटे को भरने का प्रयास था और वित्तीय सुरक्षा की उनकी भावना ने उन्हें ‘‘सड़कों, टेलीग्राफ (तारों), नहरों तथा इसी तरह के अन्य उपयोगी कार्यों को वहीं तक छोड़ देने के लिए मजबूर कर दिया जिस स्थिति में वे सैनिक विद्रोह के समय थे।’’

लेकिन उपयोगी सार्वजनिक निर्माण को बढ़ावा देने के महत्त्व को वे अच्छी तरह समझते थे और उन्हें बढ़ाने की उनकी इच्छा भी थी। यही कारण है कि उन्होंने प्रांतीय सरकारों से केन्द्र सरकार द्वारा मिलने वाली कम राशि को अन्य उपायों से बढ़ाने की पेशकश की। उन्होंने प्रांतीय सरकारों से कहाःµ

‘‘हम जो राशि देने में सक्षम हैं उसे आप ले लो और बाकी राशि के लिए

आप कर लगाने का अधिकार लो और खुद पैसा उगाहो ख्........, क्योंकि कुछ विषय

ऐसे हैं जो साम्राज्यवादी सरकार की अपेक्षा स्थानीय सरकारों द्वारा कर लगाकर

बेहतर ढंग से निपटाए जा सकते हैं।’’

स्थानीय बजट के माधयम से श्री लैंग का उद्देश्य केवल ‘‘अस्थाई परेशानी दूर करने का नहीं था बल्कि स्थाई सुधार लाने का था’’ ताकि साम्राज्यवादी कोष को राहत मिले और प्रांतीय सरकारों को फायदा मिल सके। उनकी इस योजना को आम सहमति भी मिल चुकी थी। लेकिन जब इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए सामने रखा गया तो संसद द्वारा स्थानीय सरकार के पास वह तंत्र नहीं था जिसके माध्यम से इसे लागू किया जा सके। अतः योजना का क्रियान्वयन उस समय तक टाल दिया गया जब तक स्थानीय विधान परिषदो का गठन नहीं हो जाता। लेकिन चूंकि अगले कुछ वर्ष वित्तीय खुशहाली के रहे अतः योजना से लोगों का ध्यान हट गया और अंततः उसे अनिश्चित काल के लिए समाप्त कर दिया गया।

लेकिन खुशहाली का यह दौर ज्यादा दिन टिका नहीं रहा और संकट की पुनर्वापसी की आशंका से श्री मैसी इस कदर ग्रसित रहे कि उन्हें योजना को कहीं बड़े आकार में पुनर्जीवित करने पर मजबूर होना पड़ा। ख्2, उन्होंने पेशकश कीःµ

  1. 25 नवंबर 1866 के सर बी. फेरे के कार्यवाही वृतांत (मिनट) से पैरा 30 स्थानीय सरकारों की वित्तीय

शक्तियों के विस्तार पर आलेख पृ. 42

  1. 25 फरवरी, 1866 को स्थानीय सरकारों को लिखा गया अर्द्ध-शासकीय पत्र, स्थानीय सरकारों की वित्तीय

शक्तियों के विस्तार पर आलेख, पृ. 67