3 समझौता - साम्राज्यवादी प्रबंध रहित साम्राज्यवादी वित्त व्यवस्था - Page 122

समझौता 107

‘‘स्थानीय अधिकारियों को हस्तांतरित किए जाने वाले अधिकार क्षेत्रों की पहली शृंखला के लिए मेरा पहला उद्देश्य खर्च के उन मदों का ध्यान करना है जो भारत सरकार के नियंत्रण से बहुत कम प्रभावित होते हैं और जो मिल कर इतनी राशि जुटा सकें जिसका प्रबंधन करना आसान हो तथा साथ ही इतने जरूरी भी हों कि वास्तविकता का आभास देते हों और भविष्य में वित्तीय प्रशासन का संपूर्ण हस्तांतरण स्थानीय सरकारों को किए जाने की ओर उठाया गया कदम नजर आते हों। नागरिक आकलन करने पर....मुझे सबसे आसान तरीका यही नजर आता है कि तमाम अनुदानों में से विशेष मद का चयन करने के बजाए कुछ अनुदानों का पूरा हिस्सा हस्तांतरित कर दिया जाए। .... इस योजना को स्वीकार करने से ....खाता प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सिर्फ यही बदलाव करना पड़ेगा कि विभिनन प्रयोजनों के लिए मिलने वाले अनुदान के कुछ हिस्सों का विशिष्ट तरीके से प्रबंध करना होगा, इस नियम का एकमात्र अपवाद ....मिश्रित शीर्ष का लेखा जोखा करना है ... .जो कि विभिन्न कार्य क्षेत्रों का बेमेल योग है। इनमें से स्थानीय प्रबंधन को हस्तांतरित करने के लिए वे सभी विषय रखे जाएंगे जिन्हें आसानी से स्थानीय कहा जा सकता है। ...और बचे हुए विषयों को जिनमें आसानी से प्रभारों के मुख्य शीर्षों के तहत वर्गीकृत किया जा सकता है। सबसे महत्त्वपूर्ण प्रभार जिसे मैं हस्तांतरित करना चाहता हूं वह है कानून और न्याय के तहत जेल। इसके बाद - ‘‘कानून और न्याय के तहत ही पंजीकरण और तुलुबाना आते हैं। इसके खर्चे ‘‘कानून और न्याय’’ मद के अंतर्गत जमा की गई विशेष फीस से पूरे किए जाते हैं। इन खर्चो के खिलाफ प्रक्रिया के रूप में ‘‘कानून और न्याय’’ के अंतर्गत राजस्व के अंतरण का प्रावधान है। ...‘‘शिक्षण’’ के अंतर्गत मिश्रित खर्चो का अंतरण इस मद पर मिलने वाले राजस्व के हिसाब से होगा। इसके बाद चिकित्सा व्यवस्थापन और रसायनिक परीक्षकों (मेडिकल इस्टेब्लिशमेंट एंड केमिकल एक्जामिनर्स) को छोड़ कर ‘‘स्वास्थ्य सेवाओं’’ के अंतर्गत आने वाले बाकी सभी खर्चो की बारी आती है। ‘‘स्टेशनरी तथा प्रिंटिंग’’ के खर्चो के तहत आने वाले खर्चो को भी अंतरित किया जाता हैं। ‘‘पुलिस’’ विभाग के तहत उन सभी खर्चो को जो ‘‘रेलवे पुलिस’’ सहित स्थानीय स्रोतों से जमा होने वाली राशि से चलते हैं, अंतरित किए जाते है। इसके प्रतिदान में ‘‘पुलिस’’ के अंतर्गत होने वाली ‘‘आमदनी’’ का प्रावधान है इसके अतिरिक्त मेरे विचार से भविष्य में लगाए जाने वाले भूमि कर (लगान), आयकर और लाइसेंस कर जमा करने पर आए खर्चे के एक