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नियत बजट 115

में भारत सरकार ने आयकर की चालू दर को कम करने का निर्णय लिया। ऐसा आयकर की ऊंची दर के खिलाफ उठती अमीर तबकों की आवाज को बंद करने के लिए किया गया। आयकर की दर को कम करने से पैदा हुए 1,000,000 पौंड के अतिरिक्त घाटे को पूरा करने के संभावित तरीकों के रूप में भारत सरकार ने 17 अगस्त 1870 को एक अन्य गोपनीय परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया जिसमें प्रांतीय बजट की तैयार की गई योजना को विस्तार दिया गया। इस परिपत्र (सर्कुलर) में यह कहा गया था किःµ

‘‘अगर आयकर घटता है तो सरकार को अन्य उपाय करने होंगे... मुख्यतः

स्थानीय सरकारों के कार्यालयों के माध्यम से उन उपायों को अपना कर जो

प्रत्येक प्रांत के लिए सबसे अधिक उपयुक्त हों तथा जनता पर कम से कम

बोझ लादते हों।’’

स्थानीय सरकारों पर बोझ लादने का जो तरीका अपनाया गया उसके तहत स्थानीय प्रकृति के प्रशासन के कुछ विभागों की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी गई और वित्तीय वर्ष 1870-71 के लिए इन विभागों को मिलने वाली वास्तविक सहायता 10 लाख पौंड स्टर्लिंग कम कर दी गई। ख्1, कम की गई राशि को विभिन्न प्रांतों के बीच कुल वास्तविक अनुदान राशि में से प्रत्येक प्रांत की वास्तविक अनुदान राशि के अनुपात में वितरित करने का प्रावधान रखा गया और उन्हें पूरी छूट दे दी गई कि अनुदान राशि में की गई कटौती को चाहे वे पुनर्वितरण, कटौती अथवा करों के माध्यम से

  1. कुल अनुदान का तात्पर्य किसी सेवा पर हुए कुल खर्चे में से उस सेवा से हुई आमदनी को घटा कर

जो शेष राशि बचती है से है।

प्रस्ताव के परिशिष्ट ‘‘बी’’ में उन कार्यों का उल्लेख है जिनके लिए साम्राज्यवादी राजस्व से निकाल

कर राशि अलग रख दी गई थी। इन कार्यों में निम्नलिखित विभागों के भवनों और कार्यालयों के निर्माण

का काम शामिल हैःµ

अफीम इसमें कलकत्ता स्थित बोर्ड ऑफ रेवेन्यू का कार्यालय शामिल नहीं है।

टकसल और मुद्रा।

डाकघर।

तारघर।

सर्वोच्च सरकार के कार्यालय।

वायसराय के आवास।

साम्राज्यवादी संग्रहालय।

टिकट और स्टेशनरी कार्यालय कलकत्ता

कोषागार

विशप महल

गोदावारी वर्क्स

कराची हार्बर सुधार वर्तमान में साम्राज्यवादी रूप में सुरक्षित

वे सैनिक सड़कें जिनके लिए चालू वित्त वर्ष तक सैन्य कार्य के तहत सहायता राशि का प्रावधान है।