156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी बाध्य थी। लाभ के इन शर्तों वाले रास्तों से भारत सरकार को कितना फायदा हुआ, यह कहना कठिन है। फिर भी इसे नकारा नहीं जा सकता कि स्राम्राज्यवादी कोष को अच्छा खासा लाभ हुआ।
इस प्रकार परिणाम दर्शाते हैं कि निर्दिष्ट राजस्व पर आधारित प्रांतीय वित्त की योजना प्रांतीय और साम्राज्यवादी दोनों ही सरकारों की दृष्टि से सफल थी। यही कारण है कि योजना के विकास को आगे बढ़ाने के लिए दोनों सरकारें परस्पर राजी हो गईं। यही योजना का तीसरा चरण है।