6 सांझा राजस्व बजट - Page 173

158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

1,98,45,970 रुपए था, जबकि बाद में सात वर्षों के आवंटन का कुल जोड़ विशेष परिवर्द्धन के अतिरिक्त 2,20,22,770 रुपये था, जो 21,76,800 रुपये आंशिक था, और जो कुल मिलाकर लगभग 3 लाख रुपये प्रतिवर्ष था। लेकिन उसी अवधि में व्यय 2,40,77,885 रुपये था, जो 42,31,915 रुपये अधिक बैठता था, यानी लगभग छः लाख रुपये प्रति वर्ष। इसलिए 3 लाख के अतिरिक्त आबंटन और 6 लाख प्रतिवर्ष के अतिरिक्त व्यय का जो अंतर था उसे साम्राज्यवादी सरकार ने प्रांत की ऋण शोधन क्षमता को औसतन 2 - लाख प्रतिवर्ष के विशेष अनुदान के जरिए बरकरार रखा। ख्1, भारत सरकार पूरक आबंटन की व्यवस्था करते समय बेखबर नहीं थी कि इस प्रकार की खैरात देने से कोई नैतिक पतन करने वाला प्रभाव न पड़े। वास्तव में यह स्वीकार कर लिया गया था कि यह अच्छा होगा कि बर्मा प्रांत के आबंटन की अगर जरूरत महसूस हो तो 22 ½ लाख, प्रारंभ में ही कर दिया जाय, बजाय पूरक मदद के रूप में उतनी ही धनराशि का अनुदान प्रदान करने के, जो किफायत और अच्छे प्रबंध के लिए बाधा हो सकता था। बर्मा के उदाहरण ने आबंटन की पूर्ति के ढंग की त्रुटि को उजागर कर दिया था और भारत सरकार ने यह अनुभव कर लिया था कि प्रांतीय वित्त की सफलता के लिए राजस्व में लोच एक महत्त्वपूर्ण शर्त थी। इसलिए बर्मा के लिए राजस्व देयता अपरिहार्य थी। प्रांत की आवश्यकताओं से दबे रहने के कारण और इस तथ्य से कि प्रांत ने शाही कोष में काफी बेशी समर्पित की है, भारत सरकार ने यह स्वीकार किया कि ‘‘प्रांत को यह अधिकार है कि वह अपनी वास्तविक आवश्यकताओं को पहले की अपेक्षा मुक्त रूप से निर्दिष्ट करे।’’ ख्2,

इस उद्देश्य के लिए जो विधि अपनाई गई कि बर्मा प्रांत के साथ उदारतापूर्वक व्यवहार किया जाय, प्रांत को सम्पूर्ति विधि का नया कदम उठाया गया। सन् 1877-78 में पांच प्रांतµमध्य प्रांत, उत्तर पश्चिम प्रांत और अवध, पंजाब, बंबई और बंगाल के बंदोबस्त के समय राजस्व और व्यय के लेखा शीर्ष के अंतर्गत, भारत के बजट को भिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गयाः (1) पूर्णतया शाही (साम्राज्यवादी या केन्द्रीय) (2) पूर्णतया प्रांतीय। लेकिन बर्मा के मामले में लेखा शीर्ष तीन भिन्न श्रेणियों में बांटा गयाः (1) पूर्णतया शाही (2) पूर्णतया प्रांतीय और (3) शाही और प्रांतीय संयुंक्त ख्3, । जहां तक शाही अथवा प्रांतीय सरकार के राजस्व, और व्यय की मदों का सम्बंध है, बंदोबस्त भावनात्मक तौर पर दूसरे प्रांतों से प्राप्ति के मामले में अलग नहीं था। लेखा की जो तीसरी श्रेणी संयुक्त रूप से शाही और प्रांतीय बनाई गई थी उसमें अंतर विद्यमान था। इसके द्वारा कुछ विशेष राजस्व और व्यय शेष से अलग दर्शाए गए थे और शाही और प्रांतों के मध्य कुछ निश्चित तौर पर

  1. वित्त विभाग संकल्प संख्या 1488, दिनांक मार्च 26, 1879, पैरा, 2

  2. वही, पैरा 2

  3. वित्तीय लेखा, 1879-80, पैरा 24