188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कारण साम्राज्यवादी सरकार को 36,000 रुपए के अतिरिक्त व्यय भार को वहन करना पड़ा जिसे अभी तक प्रांतीय बजट में दिखाया गया था। अतः इसका शुद्ध लाभ सिर्फ एक वर्ष में सामान्य तौर पर 1,70,000 रुपए था।
जैसा कि प्रांतीय बजट योजना के प्रारंभ में भारत सरकार ने सोचा था कि अर्द्ध-स्थाई बंदोबस्त वाले प्रांतों को निम्न प्रकार प्रारंभिक अनुदान देकर एक अच्छी शुरुआत की जा सकेगीःµ
बंगाल को 50 लाख रुपए (कलकत्ता विश्वविद्यालय के लिए अतिरिक्त
50 लाख)
मद्रास को 50 लाख रुपये (20 लाख के अतिरिक्त खर्चे बंदोबस्त के
लिए शामिल थे)
सुयंक्त प्रांत को 30 लाख रुपये (ऋण ग्रस्त भू-संपत्तियों पर खर्चे की भरपाई
करने के लिए 1 ½ लाख रुपए के अतिरिक्त)। असम को 20 लाख रुपए।
सन् 1905-06 से बंबई और पंजाब के शेष प्रांतों में आगे चल कर अर्द्ध-स्थाई बंदोबस्त की व्यवस्था होनी थी।
उनके बंदोबस्त को नया रूप देने में भारत सरकार ने 1904-05 में हुए अर्द्ध-स्थाई बंदोबस्त वाले प्रांतों के विभाजन की मानक दर से थोड़ा हट कर कार्य किया। निम्नलिखित कतिपय विशेष अपवादों को छोड़कर राजस्व और व्यय के संयुक्त शीर्ष को आधा-आधा विभाजित किया गया, इसमें बम्बई में सिंचाई को सम्मिलित किया गया और साम्राज्यवादी और प्रांतीय के मध्य तीन चौथाई और एक चौथाई हिस्से को शामिल नहीं किया गया। इस नियम के निम्नलिखित अपवाद थेःµ
प्रांतीय हिस्सा प्रांतीय हिस्सा
राजस्व के बंबई पंजाब व्यय के बंबई पंजाब लेखाशीर्ष लेखाशीर्ष
भू-राजस्व 189 ¼ 3/8 भू-राजस्व पूर्णतया पूर्णतया
लाख तक
की गारंटी
पंजीकरण पूर्णतया पूर्णतया - - - सिंचाई ½ 3/8
28 लाख तक
की गारंटी
भारत सरकार के वित्तीय लेखे से संकलित