6 सांझा राजस्व बजट - Page 211

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आंशिक प्रतिस्थापन था जिसे निम्नलिखित राजस्व और व्यय के संयुक्त शीर्षों में हिस्सेदारी बढ़ाकर किया गया था (देखें पृष्ठ 200)।

राजस्व और व्यय के संयुक्त शीर्ष में हिस्सेदारी के इन संशोधनों का प्रभाव समंजक आवंटन को निम्नलिखित अंकों तक कम करना थाःµ

प्रांत साम्राज्यवादी नियतन से प्रांतीय नियतन से

प्रांतीय नियतन में साम्राज्यवादी नियतन

लाख रुपयों में लाख रुपयों में सी.पी. 21.40 - बर्मा 13.12 - पूर्व बंगाल और असम 13.55 - बंगाल - 18.40 संयुक्त प्रांत - 19.26 पंजाब 6.77 - मद्रास - 21.43 बंबई - 9.38

पंचवर्षीय और अर्द्धस्थाई बंदोबस्त की तरह स्थाई बंदोबस्त के दौरान और विशेष सेवाओं के लिए सहायतानुदान जिस पर विकेन्द्रीकरण आयोग ने भी आपत्ति नहीं की थी, विभिन्न प्रांतों को इस दौरान अवांछित रूप में प्रदान किए गए यद्यपि जैसा कि तालिका (पृष्ठ संख्या 201) में दर्शाया गया है उनके परिणाम में निरंतर कमी होती गईःµ

यह स्वाभाविक ही था कि स्थाई बंदोबस्त के परिणामों को भारी उत्सुकता से देखने के लिए प्रांत प्रतीक्षारत रहे, क्योंकि स्थाई बंदोबस्त में स्थाई लाभ अथवा स्थाई नुकसान निहित था। लेकिन इस मामले में उनकी चिंता पूरी तरह दूर नहीं हो सकती थी जबकि वह पुनरावर्त्ती लाभ द्वारा समर्थित हो उसे तालिका (पृष्ठ संख्या 202) में दर्शाया गया है जो उनके उस समय के चालू संतुलन के वार्षिक जोड़ और कटौती से ज्ञात होता है।

निस्संदेह जबकि प्रांतीय वित्त की स्थिति समृद्ध थी प्रांतीय संतुलन में अनिश्चित गति क्रमबद्ध प्रगति की उम्मीद को बिल्कुल पुष्ट नहीं कर सकी जैसी कि स्थाई बंदोबस्त में व्यवस्था की गई थी। यहां विचारणीय यह है कि यद्यपि जिस दौरान स्थाई बंदोबस्त संपन्न हुआ, वह पूर्णतः सामान्य काल नहीं था। स्थाई बंदोबस्त का कुछ हिस्सा निस्संदेह शांतिकालीन था, लेकिन इसकी अवधि इतनी लंबी नहीं