7 प्रांतीय वित्त व्यवस्था की सीमाएं - Page 223

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की अवधि तक लागू रहे और इस बीच इनमें बहुत कम संशोधन या संवर्धन किए गए। 1892 ख्2, में इनके स्थान पर एक नई नियमावली जारी की गई। लेकिन पांच वर्ष की अल्प अवधि के भीतर इस शृंखला के स्थान पर दूसरी शृंखला 1897 ख्3, में जारी की गई जो वर्ष 1912 तक लागू रही। वर्ष 1912 में किए गए स्थायी व्यवस्थापन के कार्यचालन को नियमित करने के लिए 1912 ख्4, में एक नई शृंखला जारी की गई। यही शृंखला वित्त विभाग के दिनांक 24-7-1916 के संकल्प संख्या 361 ई.ए. के द्वारा पुनः जारी की गई। लेकिन चूंकि उसमें किये गये परिवर्तन किसी दृष्टि से संगत नहीं थे अतः 1912 ख्5, की शृंखला को प्रांतीय वित्त व्यवस्था के बारे में अंतिम विनियम माना गया।

हमें यह स्वीकार करना होगा कि इन नियमों का विश्लेषण करना आवश्यक है। अतः हमें पहले यह तय करना होगा कि किस अथवा किन दृष्टिकोणों से विश्लेषण किया जाए। आरम्भ में यह बता देना आवश्यक है कि नियमों का विश्लेषण करने के दो उद्देश्य हैंः (1) यह जानना कि क्या सीमाएं थीं और (2) ये क्यों रखी गईं? यह सही है कि हमारा सर्वप्रथम उद्देश्य यह बताना है कि कौन-कौन सी सीमाएं लगाई गई थीं लेकिन यह गौण नहीं तो केवल प्राथमिक उद्देश्य है। वास्तव में दूसरा उद्देश्य अधिक महत्त्वपूर्ण है। इन सीमाओं की आवश्यकता क्यों पड़ी इस बात को ठीक ढंग से समझने के लिए उनकी जानकारी आवश्यक है। सीमाएं बताने के पहले उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह अनुमान न लगाना कल्पनातीत होगा कि अगले अध्याय में, जो हम अब आरंभ करेंगे, हमें यह मालूम हो जाएगा कि प्रांतीय वित्त के बहुत ही विचित्र स्वरूप के कारण ही ये सीमाएं लगाना आवश्यक हो गया था। दूसरी ओर, इस निष्कर्ष की प्रत्याशा करना और नियमों को क्रमानुसार प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें इस तरीके से क्रमबद्ध करना आवश्यक है कि प्रांतीय वित्त की आंतरिक अवधारणा के बाह्य स्वरूप को दर्शाएं जो विशेष रूप से इसके प्रवर्तकों के मन में व्याप्त था। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए प्रांतीय वित्त के प्रभारी अधि कारियों जिन्होंने ये नियम बनाए हैं, की मेहनत बेकार है। उनके लिए ये नियम वित्तीय नियंत्रण के साधन मात्र थे और इसलिए उन्हें किस क्रम में रखा जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। दूसरी ओर, इन नियमों की अवधारणा को समझने के लिए इन नियमों के प्रयोजनों के अनुसार इनका वर्गीकरण करना आवश्यक है।

  1. वित्त विभाग, संकल्प संख्या 3334, दिनांक 14 दिसम्बर, 1870

  2. वित्त विभाग, संकल्प संख्या 1709, दिनांक 22 मार्च, 1877

  3. वित्त विभाग, संकल्प संख्या 1142, दिनांक 17 मार्च, 1892

  4. वित्त विभाग, संकल्प संख्या 3551, दिनांक 11 अगस्त, 1897

  5. वित्त विभाग, संकल्प संख्या 249, ई.ए., दिनांक 15 जुलाई, 1912