210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(i) किसी स्थायी पद का सृजन न करें अथवा किसी पद के वेतन और भत्ते न
बढ़ाए जाएं।
1912 से पूर्व यह नियम 250 रुपये प्रतिमाह तथा इससे अधिक वेतन वाले
पदों पर लागू होता था। ख्1, लेकिन 1912 के पश्चात् यह नियम केवल उन पदों
पर लागू किया गया जिन पर साधारणतया कोई राजपत्रित अधिकारी अथवा
सिविल सेवा विनियमों के अनुच्छेद 29 ख में परिभाषित साम्राज्यिक सेवा
का कोई अधिकारी आसीन था। ख्2,
(ii) किसी अस्थायी पद का सृजन नहीं किया जाएगा अथवा किसी अधिकारी
की प्रतिनियुक्ति नहीं की जाएगी।
1992 से पूर्व यह नियम 250 रुपये प्रतिमाह तथा इससे अधिक वेतन वाले
पदों पर लागू होता था। ख्3, लेकिन 1912 के पश्चात् यह नियम केवल उन पदों
पर लागू किया गया जिनका वेतन 2500 रुपये प्रति माह से अधिक था या
अस्थायी पद के मामले में 800 रुपये प्रति माह से अधिक था या प्रतिनियुक्ति
दो वर्ष से अधिक होने की आशा होती थी। ख्4,
(iii) स्थायी पद को समाप्त नहीं किया जाएगा अथवा ऐसे पद के वेतन और भत्ते
कम नहीं किए जाएंगे।
यह नियम आरम्भ में ऐसे पदों पर लागू किया गया था जिनका वेतन 250 रुपये प्रतिमाह से अधिक था। ख्5, 1912 के पश्चात् यह नियम ऐसे पदों पर लागू किया गया जिन पर इंग्लैंड में भर्ती की जाती थी या सिविल सेवा विनियमों के अनुच्छेद 29-ख में परिभाषित राजपत्रित सिविल अधिकारी आसीन थे। ख्6,
(iv) सरकारी नौकरी करने वाले अथवा सेवा पेंशन पाने वाले सिविल अधिकारी
को अनुदान नहीं दिया जाएगा। (क) भूमि, सिवाय उन मामलों के जिनमें
इस तथ्य के बावजूद कि संबंधित प्रांत के साधारण मालगुजारी (राजस्व)
नियमों के अंतर्गत बिना किसी विशेष वित्तीय रियायत के या इसके बराबर
अनुदान दिया गया हो बावजूद इसके कि अनुदानप्राप्तकर्ता ने अन्य लोगों की
अपेक्षा पहले अनुदान प्राप्त किया। ख्7,
1897 का नियम 4(3) (क)
1912 का नियम 10(1)
1897 का नियम 4(3) (ख)
1912 का नियम 10(4) (क)
1897 का नियम 4(4)
1912 का नियम 10(3)
1912 का नियम 10(9) (क)