212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की गणना करते समय किसी सेवा के लिए जितनी राशि का अनुमान
लगाया गया वास्तव में उससे अधिक खर्च हुआ। ख्1,
(2) प्रांतीय सरकारें साम्राज्यिक राजकोष से कोई अतिरिक्त मांग भी नहीं करेंगी
परन्तु उन्हें प्राप्त धनराशि से सभी सेवाओं को सुचारू रूप से बनाए रखना
होगा। ख्2,
जहां तक प्रांतीय सरकारों की धनराशि के अभिरक्षण के बारे में प्रांतीय सरकारों की शक्तियों के संबंध में यह निर्णय किया गया।
(3) कि उनके प्रयोग के लिए आबंटित धनराशि साम्राज्यिक राजकोष में रखी
जाएगी और उसे निवेश करने अथवा अन्य किसी स्थान पर जमा करने
के लिए नहीं निकाला जाएगा, लोक सेवाओं पर खर्च करने के अलावा
प्रांतीय सरकारें ऐसे धन को निकाल भी नहीं सकेंगी। ख्3,
(2) राजस्व नियम
प्रांतीय सरकारों की वित्तीय शक्तियों पर लगे सामान्य नियंत्रण से उन पर लगे राजस्व सम्बंधी नियंत्रणों पर आते हुए इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि उन्हें प्रत्येक समझौते के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा आबंटित धनराशि से ही अपनी आवश्यकताओं को पूरा करना होता था।
प्रांत अपने संसाधनों को अपने प्राकृतिक विकास से हुई आमदनी से अधिक नहीं बढ़ा सकते थे क्योंकि यह उपबंध किया गया था कि प्रांतीय सरकारेंµ
(i) कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाएंगी अथवा विद्यमान राजस्व प्रबंधन प्रणाली में
कोई परिवर्तन नहीं करेंगी। ख्4,
(ii) अपने क्षेत्र में स्टाम्पों, न्यायालय शुल्क, लेबलों की खुदरा बिक्री और स्प्रिट
तथा औषधियों पर लगे शुल्कों पर छूट की दरों में कोई परिवर्तन नहीं करेंगी
अथवा उन्हें नहीं बढ़ाएंगी। ख्5,
(iii) अपनी वित्त व्यवस्था के लिए खुले बाजार से कोई ऋण नहीं लेंगी। ख्6,
अपने संसाधन बढ़ाने के मामले में शक्तिहीन होने के कारण प्रांतीय सरकारें
1877 का नियम 7 और 1897 का नियम 14
1877 का नियम 7 और 1897 का नियम 14
1877 का नियम 1(8), 1897 का नियम 4(11) और 1912 का नियम 5(6)
1877 का नियम 1(1), और इसके बाद के संकल्प।
1877 का नियम 1(6), बाद के संकल्पों में भी सम्मिलित किया गया।
1942 का नियम 5(13)