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प्रांतीय वित्तव्यवस्था की सीमाएं

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अपने संसाधन अपने अधीनस्थ किसी अन्य प्राधिकरण को नहीं दे सकती थी। ऐसी संभाव्यताओं से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया कि प्रांतीय सरकारेंµ

(iv) किसी स्थानीय या विशेष निधि की परिसंपत्ति बनाने के लिए सामान्य राजस्व,

साम्राज्यिक या प्रांतीय, की किसी मद को अन्तरित नहीं करेंगी। प्रांतों को

दिये गये राजस्व के संसाधनों को अन्तरित न करने सम्बंधी इस प्रावधान में

1912 के नियमों द्वारा कुछ छूट दी गई ताकि वे सिविल सेवा विनियमों के

अनुच्छेद 33 के अनुसार आवर्ती किस्म की पूर्णतया प्रांतीय राजस्व की अल्प

राशियों को जो सामान्य करों से होने वाली आय से प्राप्त नहीं होती और जो

औसतन एक वर्ष में 25,000 रुपये से अधिक नहीं होती, किसी स्थानीय

संस्था या विशेष निधि में अन्तरित कर सकें। ख्1,

(v) अपनी निधियों में से स्थानीय या नगरपालिका जैसी संस्थाओं को कोई ऐसा

अनुदान, आर्थिक सहायता या आवंटन नहीं करेंगी जिससे भारत के राजस्व

पर एक स्थायी भार पड़े।

इससे प्रांतीय सरकारों द्वारा अपनी निधियों से स्थानीय या नगरपालिका संस्थाओं को अनुदान, आर्थिक सहायता या आवंटन दिए जाने में किसी तरह की कोई बाधा नहीं हुई यद्यपि भारत सरकार ने समझौतों की अवधि समाप्त होने के पश्चात् अनुदान देते रहने या बाद में किये जाने वाले समझौतों में उनके लिए प्रावधान करने से इंकार करके प्रांतीय सरकारों को चेतावनी दे दी थी। ख्2, तथापि, 1912 के नियमों द्वारा ऐसे अनुदान देने की शक्ति स्पष्टतया इस सीमा तक सीमित कर दी गई कि एक प्रांतीय सरकार (1) किसी एक मामले में एक वर्ष में 1,00,000 रुपये से अधिक आवर्ती अनुदान प्रांतीय राजस्व से स्थानीय संस्थाओं को नहीं दे सकती थी ख्3, अथवा (2) एक प्रांतीय सरकार किसी एक मामले में 10,00,000 रुपये से अधिक अनावर्ती अनुदान स्थानीय संस्थाओं को नहीं दे सके ख्4, अथवा (3) एक प्रांतीय सरकार शिक्षा संस्थाओं को छोड़कर किसी धर्मार्थ या धार्मिक संस्थाओं को, जो भारत से बाहर न हो, 10,000 रुपये से अधिक आवर्ती अनुदान और 50,000 रुपये से अधिक अनावर्ती अनुदान नहीं देगी। ख्5,

(vi) कोई प्रांतीय सरकार किसी गैर-सरकारी व्यक्ति को (1) राजनैति कारणों से

राजस्व के बिना या अनुकूल शर्तों पर (क) भूमि या (ख) यदि भूमि का

  1. 1912 का नियम 5(5)

  2. 1897 का नियम 4(10)

  3. 1912 का नियम 10(12) (क)

  4. 1912 का नियम 10(12) (ख)

  5. 1912 का नियम 10(10)