7 प्रांतीय वित्त व्यवस्था की सीमाएं - Page 229

214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मूल्य या भू-राजस्व एक वर्ष में 1,000 रुपये से अधिक है तो उस भूमि

के भू-राजस्व का आवंटन नहीं करेंगी। ख्1, (2) सरकार की सेवा के दौरान या

सेवा के परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु होने पर उसे या उसके परिवार को क्षति

होने के विचार से अथवा (3) सरकार की विशेष सेवा के बदले में एक

वर्ष में 1,000 रुपये से अधिक पेंशन अथवा किसी एक मामले में 3,000

रुपये से अधिक ग्रेच्युटी नहीं देगी। ख्2,

(3) व्यय के नियम

प्रांतीय सरकारों को दी गई व्यय मंजूर करने की शक्तियां भी उनकी राजस्व मंजूर करने की शक्तियों की तरह ही सीमित थीं। जबकि उन्हें सौंपी गई सेवाओं पर अपनी धनराशि खर्च करने की छूट थी परन्तु कुछ प्रतिनिधि विशेष रूप से इस प्रयोजनार्थ लगाये गये थे ताकि व्यय के कुछ उद्देश्यों और विषयों को प्रांतीय सरकारों के क्षेत्राधिकार से बाहर रखा जा सके।

प्रांतीय सरकारों के अपने व्यय के उद्देश्यों के सम्बंध में प्रांतीय सरकारों से अपेक्षा की जाती थी किµ

(i) वे सरकारी धन से किसी ऐसे उद्देश्य पर किसी प्रकार के व्यय की मंजूरी

न दें जो भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त व्यय के उद्देश्यों की श्रेणी में नहीं

आता। ख्3,

(ii) प्रांतीय सरकारें ऐसी सेवाओं तक ही सीमित रहें जो समझौते की शर्तों के

अनुसार विशेष रूप से उन्हें सौंपी गई हैं।

1912 से पूर्व प्रांतीय सरकारें और कोई नई सामान्य सेवा या काम तभी अपने हाथ में ले सकती थीं जब वे भारत सरकार को आश्वस्त कर देती थीं कि यदि यह अस्थायी है तो वे अस्थायी तौर पर और यदि यह स्थायी है तो स्थायी तौर पर इसके लिए आवश्यक धनराशि का प्रावधान कर सकती हैं। ख्4, इस प्रावधान को 1912 में बदल दिया गया ताकि एक प्रांतीय सरकार कोई नई सामान्य सेवा या काम अपने हाथ में ले सके बशर्तें कि यह (क) असामान्य किस्म का न हो, अथवा (ख) ऐसे उद्देश्यों के प्रति समर्पित न हो जो प्रशासन के साधारण काम से बाहर हैं, अथवा

  1. 1912 का नियम 10(7)

  2. 1912 का नियम 10(8)

  3. 1897 का नियम, बाद के संकल्पों में भी इसे सम्मिलित किया गया

  4. 1887 का नियम (4(2)

  5. 1912 का नियम 5(11)