216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(2) देशीय रियासतों को किसी एक परियोजना के लिए एक वर्ष में 10,000 रुपये से अधिक और यदि अनावर्ती व्यय है तो सीधे 50,000 रुपये से अधिक। ख्1,
(4) बजट नियम
श्री विल्सन द्वारा 1860 ख्2, में पहली बार भारत में आरम्भ की गई बजट प्रणाली के साधारण नियमों के अध्यधीन होने के अलावा, जिनके अन्तर्गत प्रांतीय सरकारों से मंजूरी के लिए भारत सरकार के समक्ष अपने बजट प्राक्कलन प्रस्तुत करने तथा अनुदानों के निष्पादन में विनियोग नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती थी, प्रांतीय सरकारों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि भारत सरकार की पूर्व सहमति के बिना वेµ
(i) साम्राज्यिक राजकोष में अपनी जमा राशि खर्च नहीं कर सकतीं।
1887 से पूर्व प्रांतीय सरकार अपने बजट प्राक्कलनों में अपनी पूरी बकाया राशि निकालने का प्रस्ताव रख सकती थी। लेकिन तब बनाए गए नियमों के अन्तर्गत प्रांतीय सरकार के लिए हर समय साम्राज्यिक राजकोष में एक निश्चित न्यून्तम बकाया राशि रखना आवश्यक हो गया। बाद के प्रत्येक समझौते में यह राशि घटती-बढ़ती रहती थी।
(iii) घाटे का बजट, अर्थात् सम्बंधित वर्ष के प्रांतीय राजस्व से अधिक प्रांतीय
व्यय का बजट नहीं बना सकती थी।
इस नियम ख्3, की कट्टरता को कुछ कम किया गया जिससे कि 1912 के पश्चात् एक प्रांत घाटे का बजट बना सकता था यदि यह भारत सरकार को आश्वस्त कर देता है कि ऐसा विशेष और अनावर्ती कारणों में किया जा रहा है ख्4,, लेकिन साथ ही यह भी प्रावधान किया गया कि यदि घाटे को पूरा करने के लिए साम्राज्यिक राजकोष से राशि निकालने पर राजकोष में बकाया राशि घटकर निर्धारित न्यूनतम राशि से कम हो जाती है तो घाटे के बजट की मंजूरी तभी दी जाएगी जब भारत सरकार सम्बंधित प्रांतीय सरकार को इतने ही ओवरड्राफट की अनुमति देगी कि सामान्य राजस्व से साम्राज्यिक राजकोष में धनराशि जमा करके इसे बकाया निर्धारित न्यूनतम स्तर तक लाया जा सके और ओवरड्राफट का भुगतान ब्याज की दरों तथा किश्तों में किया जाएगा जो निर्धारित की जाएगी। ख्5,
(iii) एक वर्ष के दौरान किसी लेखा शीर्ष पर इसके लिए उस वर्ष अंतिम रूप
से भारत सरकार द्वारा मंजूर राशि से अधिक खर्च नहीं करेंगी।
1912 का नियम 10(13)
1892 का नियम 11, 1897 का नियम 13 और 1912 का नियम 19
1892 का नियम 8
1912 का नियम 21
1912 का नियम 21 और 22