218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रांतीय सरकारों की वित्तीय शक्तियों पर इस प्रकार के नियंत्रण लगाये गये थे। इन विशिष्ट नियंत्रणों के अलावा भी प्रांतीय सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में अपनी नियति की स्वतंत्र निर्माता नहीं थीं क्योंकि किसी विभाग के पर्यवेक्षण और नियंत्रण का अधिकार अभी भी गवर्नर जनरल इन काउंसिल को था और प्रांतीय सरकारों के लिए यह आवश्यक था कि वे अपनी कार्यपालिका और वित्तीय कार्यवाही के बारे में उसे पूरी सूचना देते रहें ताकि वह शांति, व्यवस्था और सुशासन सम्बंधी अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन कर सकें। ख्1, प्रांतों की वित्तीय स्वतंत्रता पर उनके सामान्य प्रभाव को छिपाया नहीं जा सका। इन भारी नियंत्रणों के होते हुए यदि प्रांतीय वित्तव्यवस्था की स्वतंत्रता के मामले में वे अपनी आस्था नहीं रखते और यह नहीं पूछते कि इस भ्रामक संस्था का अन्ततः स्वरूप क्या है और इसके लाभ क्या हैं तो उनका मानस या मन बहुत ही अधिक अभेद्य होता।
- 1877 का नियम 5, 1897 का नियम 15 और 1912 के नियम 6 और 7