220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रेलवे और लेखा तथा लेखा परीक्षा जैसे मामलों पर नियंत्रण था जबकि प्रांतीय सरकारें साधारण आन्तरिक प्रशासन जैसे पुलिस, शिक्षा, सफाई, सिंचाई, सड़कें और इमारतें, जंगलात जैसे मामलों का संचालन करती थीं और स्थानीय संस्थाओं पर भी इनका नियंत्रण था। यदि इस प्रसंग से इस दृष्टिकोण को बल मिलता है कि केन्द्रीय और प्रांतीय सरकारें अलग-अलग सेवाओं का निष्पादन करती थीं तो केन्द्रीय और प्रांतीय सरकारों के बीच सम्बंधों का एक दूसरा प्रसंग है जिससे इस विचार को बल मिलता है कि ब्रिटिश भारत में केन्द्रीय और प्रांतीय सरकारों के राजस्व भी अलग-अलग थे। इस प्रसंग के अनुसार भारत में अधिकांश करों की वसूली प्रांतीय सरकारों द्वारा की जाती थी। भारतीय व्यय के बारे में रायल आयोग ने यह टिप्पणी की हैः ख्1,
‘‘यूनाइटेड किंगडम में राजस्व प्रशासन केन्द्रीयकृत है जो लंदन में वित्त मंत्री
(चांसलर ऑफ दि ऐक्सचैकर) के अधीन है। भारत में राजस्व की कुछ शाखाओं
का प्रशासन केन्द्रीयकृत है। यद्यपि यह सदैव (भारत सरकार के) वित्त मंत्री के
अधीन नहीं होता। अन्य शाखाओं का प्रशासन विकेन्द्रीयकृत है।’’ µ भू-राजस्व
(मालगुजारी) कलकत्ता में स्थित केन्द्रीय विभाग के नियंत्रणाधीन है लेकिन वह
विभाग वित्त मंत्री के अधीन नहीं है अपितु गृह और राजस्व विभागों के प्रभारी
मंत्री के अधीन है। तार विभाग लोक निर्माण मंत्री के नियंत्रणाधीन है। नमक शुल्क
का कुछ भाग, और अफीम राजस्व का कुछ भाग डाकघर राजस्व तथा अन्य
प्रकार के राजस्वों की वसूली पर केन्द्रीय सरकार का नियंत्रण है ख्......................, शेष
राजस्व प्रांतीय सरकारों द्वारा वसूल किया जाता है। ख्..................., जहां तक राजस्व के
एक बड़े भाग की वसूली का सम्बंध है, इस बारे में प्रांतीय सरकारें प्रशासन की
इकाइयां हैं और वे अपने कर्त्तव्यों के निष्पादन के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।’’
इसी विचार का समर्थन करने वाले तीसरे प्रसंग के रूप में भारतीय लेखाओं को प्रस्तुत करने के लिए सरकारी अधिकृत रिपोर्टों (बुक्स) में अपनाये गये अनूठे तरीके का उल्लेख किया जा सकता है जैसा कि ध्यान में आया होगा, भारत सरकार के सामान्य लेखाओं के साथ एक अनुपूरक लेखा संलग्न किया जाता है जिसमें ब्रिटिश भारत के विभिन्न प्रांतों में आय और व्यय के विभिन्न शीर्षों के विभाजन के बारे में जानकारी दी जाती है। लेखाओं को दर्शाने का यह तरीका निस्संदेह गुमराह करने वाला है। ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसा करने का उद्देश्य प्रांतों की वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी देना था। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रांतों की आय और व्यय के बारे में जो आंकड़े दिये गये हैं वे विभिन्न
- अंतिम प्रतिवेदन का पैरा 25