222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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| 1- 1871&72 1882&83 1892&93 1904&05 1912&13 |
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| eè; izkar -655 -464 -615 -297 -204 cekZ -728 -575 -598 -497 -38 vklke & -438 -390 -376 & caxky -903 -746 -761 -742 -596 mÙkj&if'pe -785 -617 -435 & & izkar vkSj vo/ iatkc -768 -648 -726 -512 -391 enzkl -828 -664 -667 -638 -479 cacbZ -845 -648 -66 -614 -58 la;qDr & & & -567 -381 izkar fcgkj vkSj & & & & -220 mM+hlk |
-9 -69 1-3 -55 -59 3-4 -39 -7 4-37 3-08 & -75 -75 -87 & 2-4 1-99 2-9 2-29 2-39 1-5 1-24 1-4 & & 1-7 1-5 1-4 1-57 1-64 2-3 2-0 2-3 2-34 1-79 5-0 4-1 5-4 4-75 5-6 & & & 1-48 -93 & & & & -17 |
भारत सरकार के वित्त और राजस्व लेखाओं का दसवार्षिक जनगणना प्रतिवेदनों से संकलित।
इसी प्रकार विभाजित राजस्व शीर्ष व्यवस्था को बदल कर इसके स्थान पर पृथक राजस्व व्यवस्था लागू करने और केन्द्रीय सरकार को प्रांतीय सरकारों द्वारा (1) एक निश्चित राशि जिसमें हर कुछ वर्षों में संशोधन किया जा सके, या (2) प्रांतीय राजस्व पर एक समान प्रतिशत, या (3) प्रांतीय सरकारों द्वारा अपने प्रांत की आबादी, राजस्व या सम्पत्ति पर केन्द्रीय सरकार को घटता-बढ़ता अंशदान दिये जाने के प्रस्तावों की तुलनात्मक खूबियों के बारे में जो कुछ भी कहा जाए, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि इनका उद्देश्य साम्राज्यिक राजकोष के बोझ को बांटने का कोई ऐसा बोधगम्य आधार ढूंढना था जिससे प्रांतों को बराबर या देने की क्षमता के अनुसार भुगतान करना पड़े। किसी व्यक्ति से, जिसने प्रांतीय वित्तव्यवस्था के सही स्वरूप को समझने का प्रयास किया हो यह आशा नहीं की जा सकती थी कि वे इन प्रस्तावों